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कभी नहीं थे 2 रुपए का बिस्कुट खरीदने के पैसे आज अपनी मेहनत के बलबूते पर खड़ा किया करोड़ो का ये बिज़नेस

पैसे कमाना आज के समय में बहुत मुश्किल हो गया है जितना मुश्किल कमाना है   उतना ही आसान  है खर्च करना  फिर भी अगर आप सच्ची मेहनत और लगन से काम करते है आप को अपनी मंजिल मिल सकती है   अगर कोई इन्सान काम को छोटा और बड़ा न समझ कर मन लगाकर काम करता है तो उसे सफलता अवश्य  मिलती है और वो इंसान बुलंदियों पर पहुचता है ये कहानी है महाराष्ट्र के एक व्यापारी की जिसके पास एक समय था 2 रूपये नहीं थे अपनी फूल जैसी बच्ची को आइसक्रीम खिलाने के लिए और आज वो  करोड़ो के मालिक है आइये बताते है शून्य से करोड़ो का सफ़र कैसे तय  किया-  

दरअसल आज हम जिस इंसान की बात कर रहे है वह कोई और नहीं महाराष्ट्र में चाय की दूकान का मालिक है दरअसल ये कोई मामूली चाय वाला नहीं है। उन्होंने पुणे में चाय की रोटी बेचने का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने पुणे में येओला टी हाउस नाम से एक चाय बेचने वाला स्टार्टअप शुरू किया। लेकिन लोगों ने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें अपनी चाय इतनी पसंद आएगी। लोगों को उनकी चाय का स्वाद पसंद आने लगा और धीरे-धीरे उनके ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी। लोग उसकी चाय की तारीफ करते थे और दूसरों को उसकी दुकान पर लाते थे। उनके ग्राहकों ने उन्हें बढ़ावा दिया और चाय के क्षेत्र में एक अलग नाम कमाया।

दरअसल आपको बता दे ये कहानी बेहद दिलचस्प है नवनाथ नाम के इस शख्स ने सबसे पहले चाय का बिज़नेस शुरू करने से पहले उसके बारे में अच्छी जानकारी ले ली थी। उन्होंने सारी जानकारी हासिल कर ली थी की लोगो को कैसी चाय पीना पसंद है चाय में ऐसी क्या चीज़े डालनी चाहिए जिसकी वजह से चाय ज्यादा स्वादिष्ट बनाई जाए  उन्होंने इन सब बातों का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया।वह लगातार चाय के साथ एक्सपेरिमेंट भी कर रहे थे,लोगों के रिएक्शन ले रहे थे. तो उसकी चाय का स्वाद लोगों की जुबान पर आ गया। येओला टी स्टॉल पर चाय पीने वालों की भीड़ बढ़ने लगी। धीरे-धीरे चाय का यह दौर पूरे शहर में मशहूर हो गया। येओलाले की चाय की दुकान पर दूर-दूर से लोग चाय पीने के लिए आने लगे।

उनकी चाय की दूकान पर भीड़ बढ़ने लगी जिसके बाद उन्हें स्टाफ हायर करना पड़ा, और देखते ही देखते उन्हें अलग-अलग ब्रांच खोलनी पड़ी। उन्होंने चाय की अंतिम गुणवत्ता पर फैसला किया। भीड़ को देखते हुए उन्हें स्टाफ भी हायर करना पड़ा और देखते हुए दूसरी ब्रांच खोलनी पड़ी। उन्होंने अपनी चाय की दुकान का नाम येओला नेक्टर रखा है।यह येओला का अमृत है। उनके प्रत्येक केंद्र में 10 से 12 लोग कार्यरत हैं। उनका एक केंद्र एक दिन में 3,000 से 4,000 कप चाय बेचता है। नतीजतन, उनका वार्षिक कारोबार आज 40 करोड़ रुपये से अधिक है। तब से, येओला टी हाउस की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई है कि वे अब इस चाय ब्रांड को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाना चाहते हैं।

आपको बता दे नवनाथ ने ये साबित कर दिया कि दुनिया में कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। बड़ा हो या छोटा बस लोगों के सोचने का तरीका और उनका नजरिया होता है। अगर आप अपना नजरिया बदलेंगे तो शायद पूरी स्थिति बदल जाएगी।इंसान को कोई भी काम करने से पहले सोचना नहीं चाहिए की ये काम बड़ा और छोटा होता है। इतना ही नहीं नवनाथ ने बताया की भविष्य में वनथ की योजना देश और विदेश में येओला अमृत के और केंद्र खोलने और इसे एक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड बनाने की है।

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