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साल 2017 की 10 फिल्मे,जिन्हें आंका गया था कमज़ोर, लेकिन रिलीज़ होते ही मचा दिया था धमाल

मित्रों अक्‍सर हम लोग कुछ ऐसी फिल्‍में देखते है, जिसे देखने के पश्‍चात मन में कई तरह के ख्‍याल आने लगतें होगें, तो कुछ ऐसी भी फिल्‍में हुआ करती है, तो देखने के पश्‍चात दिल गार्डन गार्डन हो जाता होगा। आपको बता दे कि बॉलीवुड ने ऐसी कई फिल्‍में हमे मनोरंजन के लिये दी है, जो काफी पसन्‍द आ रही है। आज हम 2017 की उन चुनिंदा फिल्‍मों की बात करने वाले है, जिन्‍हे रिलीज के दौरान कमजोर आंका गया था। इस संबंध में एक खास रिपोर्ट

आपकी जानकारी के लिये बता दे कि अक्‍सर लोग फिल्‍मों को देखने के लिये वीकेंड का महंगा टिकट खरीदते है, भूख लगने पर पॉपकॉर्न खरीदते है, पर जब थिएटर से बाहर निकलते है, तो ऐसा महसूस करते है, जैसे किसी ने मेरी जेब काट ली हो। क्‍योंकि जिस हिसाब से पोस्‍टर पर फिल्‍म की तस्‍वीर दिखायी जाती है, उस हिसाब से पूरी फिल्‍म देखने के बावजूद भी कुछ समझ में नही आता है। हालांकि इस तरह की फिल्‍म अगर घर पर आती है, तो बिना देर किये हुये चैनल बदल दिया जाता है, और तो और कुछ लोग तो अपना समय बीताने के लिये फिल्‍मों का सहारा लेते है, तो वहीं कुछ लोगों को इतना भी समय नही है, वो कोई फिल्‍म देख पाये, पर आज हम कुछ ऐसी फिल्‍मों के संबंध में बताने वाले है, जो 2017 में आई थी, उनके नाम आज हम आपसे शेयर करने जा रहे है, जो कुछ इस प्रकार से है……

** ‘गुड़गांव’ : अगर आप डार्क थ्रिलर फ़िल्में देखना पसंद करते हैं तो यह फिल्म आपके लिए है। ‘गुड़गांव’ शहर की एक फैमिली की ये कहानी आपको आखिरी तक बांधे रखती है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी का जबरदस्त अभिनय भी देखने लायक है।

** ‘ट्रैप्ड’ : राजकुमार राव इस साल अन्य एक्टर्स के मुकाबले उभरकर सामने आए हैं। ‘ट्रैप्ड’ भी उनके अभिनय से सजी एक ऐसी ही फिल्म है जो आपको सीट से हिलने का मौका नहीं देती। इसमें दिखाया गया है कि हालात कैसे भी हों, इंसान को हार नहीं माननी चाहिए। 

**  ‘अ डेथ इन द गंज’ : कई फिल्म फेस्टिवल्स का हिस्सा बन चुकी कोंकणा सेन शर्मा द्वारा निर्देशित यह फिल्म पारिवारिक भावनाओं के उथल-पुथल और रिश्तों के अनदेखे पहलू पर रोशनी डालती है। इस फिल्म को एक बार देखना तो बनता है।

** ‘हरामखोर’ : कई फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जा चुकी नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फिल्म ‘हरामखोर’ बॉक्स ऑफिस पर तो कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकी लेकिन शादीशुदा टीचर और मासूम स्टूडेंट की यह कहानी काफी मनोरंजक है। इसे एक बार जरूर देखा जाना चाहिए।

** ‘न्यूटन’ : राजकुमार राव और पंकज त्रिपाठी के अभिनय से सजी इस फिल्म को अगर आपने मिस कर दिया है तो शायद आपने बहुत बड़ी गलती कर दी है। भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए भेजी गई यह अधिकृत एंट्री वाली फिल्म देश के दूर-दराज इलाकों में होने वाले चुनाव और वहां के लोगों की समस्याओं को दिखाती है। 

** ‘लिपस्टिक अंडर माय बुरका’ : हमारे समाज में महिलाओं की आजादी को जकड़ने वाली बेड़ियों पर वार करने वाली इस फिल्म को लेकर काफी विवाद हुआ था। यह फिल्म महिलाओं की जिंदगी और उनकी परेशानियों को काफी करीब से दिखाती है।

** शुभ मंगल सावधान : आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर की इस फिल्म में मर्दाना कमजोरी जैसे गंभीर मुद्दे को बहुत मजेदार अंदाज में दिखाया गया है। यह फिल्म एडल्ट सब्जेक्ट पर बेस्ड होने के बावजूद बिलकुल भी अश्लील नहीं है और आपका भरपूर मनोरंजन भी करती है।

** ‘हिंदी मीडियम’ : इरफ़ान खान जैसे शानदार एक्टर्स के अभिनय वाली यह फिल्म एक अहम सामाजिक मुद्दे को इतने मजेदार ढंग से आपके सामने पेश करती है कि आपका मनोरंजन भी होता है और आप सोचने पर भी मजबूर हो जाते हैं।  

** ‘बरेली की बर्फी’ : अपने नाम की तरह ‘बरेली की बर्फी’ एक स्वीट फिल्म है जो आपको एक सेकंड के लिए भी बोर नहीं होने देती। इस फिल्म का मुख्य आकर्षण राजकुमार राव का अभिनय है। राजकुमार इस फिल्म में कृति सैनॉन और आयुष्मान खुराना पर भी भारी पड़े हैं।

** ‘द गाजी अटैक’ : भारत और पाकिस्तान के बीच हुए अंडरवाटर युद्ध पर आधारित यह फिल्म बेहद रोचक है। फिल्म में आखिर तक रोमांच बना रहता है। 

** ‘मॉम’ : श्रीदेवी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, अक्षय खन्ना के दमदार अभिनय वाली यह फिल्म एक माँ और बेटी के रिश्ते की कहानी है। फिल्म में दिखाया गया है कि माँ कितनी पावरफुल होती है और अपने हक की लड़ाई अकेले भी लड़ सकती है। 

**  ‘शादी में जरूर आना’ : हाल ही में रिलीज हुई राजकुमार राव की फिल्म ‘शादी में जरूर आना’ एंटरटेनमेंट का एक कम्पलीट पैकेज है। फिल्म में रोमांस, बदला, बेहतरीन गाने, दमदार डायलॉग्स, ट्विस्ट्स जैसे सभी मसाले मौजूद हैं।  

** ‘बेगम जान’ : बेगम जान, आजादी के समय कोठे में रहने वाली वेश्याओं की फिल्म है जो आपके दिल को छू लेती है। यह फिल्म ‘बेगम जान’ नाम की एक महिला की बहादुरी की कहानी कहती है, जिसे बंटवारे या आजादी से कोई फर्क नहीं पड़ता, वो अपना कोठा बचाने के लिए लड़ाई छेड़ देती है।

** ‘करीब-करीब सिंगल’ : ‘करीब-करीब सिंगल’ में भी आपको ‘टैलेंट की खान’ इरफ़ान खान का बेबाक अंदाज देखने को मिलता है। ‘डेटिंग ट्रिप’ वाली ये अनोखी लव स्टोरी आपके दिल में उतर जाने का दम रखती है। 

** ‘राग देश’ : ‘पान सिंह तोमर’ और ‘साहब बीवी और गैंगस्टर’ जैसी फ़िल्में बनाने वाले तिग्मांशु धुलिया की यह फिल्म साल 1945 में आजाद हिन्द फौज के तीन जवानों की कहानी दिखाती है। इस फिल्म में आजादी की कुछ अनसुनी घटनाओं और किस्सों को दिखाने की बेहतरीन कोशिश की गई है। 

उपरोक्‍त फिल्‍मों के संबंध में आप लोगों की क्‍या प्रतिक्रियायें है? कमेंट बॉक्‍स में अवश्‍य लिखें। मित्रो अधिक रोचक बाते व लेटेस्‍ट न्‍यूज के लिये आप हमारे पेज से जुड़े और अपने दोस्तो को भी इस पेज से जुड़ने के लिये भी प्रेरित करें।

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