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एक कमरे में रहते थे 17 भाई बहन,16 साल की उम्र में ही सोच लिया था जनता की सेवा करूंगा,पिता को ही दे दी नसीहत

मित्रों इस बात में तो कोई दो राय नही है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार सरकार ने कई ऐसे ऐतिहासिक फैसले जनताहित में लिये है जो कि चौकाने वाले है जैसे कि आंतकी गतिविधी पर रोक और आवेध बूचड़ खानों पर रोक, जीएसटी लागू हुई, साथ ही मनचलों पर भी कड़ी कार्यवाही की गई। इसके अतरिक्त कई ऐसे बड़े फैसले देशहित में लिये गये और उसपे अमल भी किया जाने लगा हैं। इन कार्यों के माध्यम से मौजूदा सरकार जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का काम किया है। जिसके फलस्वरूप हालही के चुनाव में दूसरी बार योगी सरकार अपनी सरकार बनाने में कामयाब रहे। इसी क्रम में आज हम मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ के बचपन के 10 ऐसे किस्सों के संबंध में बताने वाले है, जिनके संबंध में शायद ही आप लोगों को पता होगा30 बार असफल होने पर भी नहीं मानी हार, यूपीएससी परीक्षा पास कर बनें IPS अधिकारी

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि हमारे मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ जी का जन्म पांच जून 1972 को उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल जिले स्थित यमकेश्वर तहसील के पंचुर गांव में हुआ था। पिता आनंद सिंह बिष्ट एक फॉरेस्ट रेंजर थे। मां सावित्री देवी गृहिणी हैं। संन्यास धारण करने से पहले योगी का नाम अजय सिंह बिष्ट था। अजय सिंह सात भाई-बहन हैं। इनमें तीन बहन और चार भाई हैं। बड़ी बहन शशि पयाल माता भुवनेश्वरी देवी मंदिर के पास चाय-नाश्ते की दुकान चलाती हैं। योगी के बड़े भाई का नाम मानवेंद्र मोहन है। दो लोग उनसे छोटे हैं जिनका नाम शैलेंद्र मोहन और महेंद्र मोहन है। शैलेंद्र आर्मी में हैं, जबकि दो अन्य भाई एक कॉलेज में काम करते हैं। दो अन्य बहनें गृहणी हैं। 2020 में पिता आनंद सिंह बिष्ट का निधन हो गया था। वहीं अगर बात की जाये इनके बचपन की 10 बातों की तो वो कुछ इस प्रकार से है…..

1 : योगी को कुलद की दाल बहुत पसंद है योगी आदित्यनाथ को कुलद की दाल बहुत पसंद है। ये उत्तराखंड का प्रसिद्ध व्यंजन है। इसे गढ़वाल में फाड़ू बोलते हैं। योगी की बड़ी बहन शशि कहती हैं, ‘भाई को फाड़ू बहुत पसंद है। जब भी मैं फाड़ू बनाती थी तो वो मेरे पास आकर और दाल मांगता था। बोलता था कि दीदी तुम दाल बहुत अच्छा बनाती हो।’

2 : शशि बताती हैं कि करीब 31 साल पहले जब मेरी शादी होने वाली थी तब महाराज जी (योगी आदित्यनाथ) ही मेरे लिए डोली लाए थे। राखी बांधने के सवाल पर शशि ने बताया कि अब तो उन्हें याद भी नहीं है कि आखिरी बार उन्होंने कब योगी आदित्यनाथ को राखी बांधी थी। हालांकि, हर बार राखी जरूर भेजती हैं।

3 : योगी आदित्यनाथ के जीजा पूरन पयाल ने भी पुरानी यादों को ताजा किया। उन्होंने बताया कि शशि से जब मेरी शादी हुई उसके बाद करीब दो-ढ़ाई साल तक महंत जी (योगी आदित्यनाथ) हम लोगों के साथ रहे। वह शुरू से सख्त मिजाज के रहे। अगर मुझसे भी कोई गलती हो जाती थी तो वह संकोच नहीं करते थे। तुरंत डांट लगा देते थे।

4 : शशि बताती हैं कि जब योगी 15-16 साल के थे तब उन्होंने पिता जी से कहा था, ‘क्या पिता जी आप तो अपना ही परिवार पालते हो। कभी जनता की सेवा भी कर लिया करो।’ तब पिता जी ने उनसे कहा था कि बेटा मेरी तो 85 रुपये की तनख्वाह है। मैं तो तुमको पाल लूं वही बहुत है। फिर आगे पिता जी ने बोला कि देखता हूं तू क्या करता है…।

5 : योगी की बहन शशि कहती हैं कि वह सात भाई-बहन हैं। छोटे पर भी सब एकजुट होकर रहते थे। कभी लड़ाई नहीं होती थी। मेरे सभी भाई बड़ों का बहुत सम्मान करते थे। शशि कहती हैं, ‘हम सात भाई-बहन थे। इसके अलावा एक ताऊजी के आठ लड़के और एक लड़का व एक लड़की दूसरे ताऊ जी के थे। हम लोग इतने भाई बहन थे लेकिन गांव में किसी को पता नहीं लगता था कि हम कितने भाई-बहन हैं। कोई शोर नहीं होता था। हम सब पढ़ाई भी एक कमरे में करते थे।48 वर्षों से हाथ को हवा में उठाये हुए है बाबा वजह जान कर चौक जायेंगे 

6 : शशि बताती हैं कि बचपन में सभी 17 भाई-बहन एकसाथ एक कमरे में पढ़ते थे। तब लाइट नहीं होती थी। लानटेन बीच में रखते थे और फिर बाकी सब गोल घेरे में बैठकर पढ़ते थे। अगर कोई सो जाता था तो उसे जगाते थे। कहते थे… अरे अभी रोटी खानी है। फिर मां सबको नीचे ले जाती थी… कमरे में सबको खाना खिलाती थी।

7 : शशि बताती हैं कि जब भाई कॉलेज में पढ़ रहा था तब एक कार्यक्रम में गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ आए थे। यहीं भाई ने उनसे मुलाकात की थी। उस कार्यक्रम में भाई ने भाषण दिया था, जिसे सुनकर महंत जी खुश हो गए थे और उन्होंने गोरखपुर बुलाया था।

8 : एक इंटरव्यू में योगी के पिता ने कहा था, ‘1993 में उनका (योगी आदित्यनाथ) परिचय महंत अवैद्यनाथ जी से हुआ। तब अवैद्यनाथ जी सांसद थे। योगी से उन्होंने कहा था कि तुम मेरे उत्तराधिकारी बन जाओ। लेकिन पहले परिवार से पूछकर आओ। तब वो घर आए। अपनी मां से उन्होंने गोरखपुर जाने के लिए कहा। तब मां ने सोचा कि नौकरी करने के लिए जा रहे होंगे। लेकिन किसी को नहीं मालूम था कि वो संत बन जाएंगे।

9 : शशि बताती हैं कि जब हम लोगों को मालूम चला कि भाई गोरखपुर में है तो पिता जी उनसे मिलने गए। वहां उन्होंने देखा कि भगवा धारण किए, सिर मुड़ाए एक युवा संन्यासी फर्श की साफ-सफाई करवा रहा था। जब वो पास पहुंचे तो वह मेरा भाई था। पिता जी ने उसी वक्त उन्हें वापस घर आने के लिए बोला। कहा था कि वापस घर चलो, तुम्हारी मां का रो रोकर बुरा हाल है। लेकिन भाई ने मना कर दिया।

10 : शशि कहती हैं कि भाई ने वापस लौटने से मना कर दिया तो पिता जी वापस घर आ गए। फिर मां भी उनके साथ दोबारा गोरखपुर गईं। भाई को देखते ही मां रोने लगीं थीं। तब भाई ने मां से कहा था कि छोटे परिवार से अब बड़े परिवार में आया हूं। उसी रूप में जीवन जी रहा हूं।

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