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कभी सड़को पर कूड़ा बीनकर 5 रु में गुजारा करती थी महिला, आज बन गयी करोड़ो की मालकिन, जानिए कैसे

मित्रों जैसा की आप सभी  अवगत ही होगें कि आज के समय में इतनी मंहगई हो गई है कि गरीबों को अच्छे तरीके से खाना तक नही मिल पा रहा है। इस दौर में गरीबों के लिये कोई विशेष व्यवस्थायें अभी तक नही हो पा रही थी हालाकि ये बात अलग है कि मौजूदा सरकार इस पर विशेषकर ध्यान दे रही है। मित्रों गरीबी वह एक अभिश्राप है जिसकी वजह से लोगों का जीवन-यापन सही ढंग से नही चल पा रहा है। वहीं बात चाहे आज के युग की हो या बीते हुये युग की अपार धन की प्राप्ति हर व्यक्ति की चाहत है। पर सिर्फ चाहने से धन नही मिलता है उसके लिये मन में लगन व तड़प भी होना आवश्यक है। इसी क्रम में आज हम एक ऐसी महिला के संबंध में बताने वाले है जो कूड़ा बीनकर 5 रूपये में गुजारा करती थी पर आज वो करोड़ों की मालकिन है। 90 साल की बुजुर्ग महिला ने ऑनलाइन शुरू किया कमाल का बिजनस,देश ही नही विदेशो से आते है जम कर ऑर्डर

दरअसल जिस महिला के संबंध में बात की जा रही है वह 60 साल की है, जो 1981 तक कचरा बीनने का काम करती थी, अब 1 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार के साथ एक सफाईकर्मी सहकारी समिति की प्रमुख है। पहले मंजुला अहमदाबाद की सड़कों पर कबाड़ बीनने का काम करती थी, मुश्किल से दिनभर मे पाँच रुपय कमाती थी। उसे क्या ही मालूम था कि वह कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। वर्ष 1981 तक पूरे दिन सड़कों से कूड़ा, कबाड़ के पश्चात कठिनाईयों से दिन भर में पांच रुपये ही एकत्र कर पाती थी, पर मंजुला वाघेला, 2015 के आंकड़े के हिसाब से उनका सालाना कारोबार तकरीबन एक करोड़ रुपये का था। वे आज क्लीनर्स को-ऑपरेटिव की प्रमुख के तौर पर कार्य कर रही हैं इस संस्था में आज 400 लोग हैं। क्लीनर्स को-ऑपरेटिव आज गुजरात में 45 संस्थानों और सोसाइटीज को सफाई और गृह व्यवस्था की विश्वसनीय सुविधा मुहैया कराते हैं। एक दिन मंजुला की जिंदगी में एक नया अध्याय तब खुलता है, जब उनका परिचय सेल्फ-एम्प्लॉयड विमेंस एसोसिएशन की संस्थापक इला बेन भट्ट से होती है। वे 40 लोगों वाली श्री सौंदर्य सफाई उत्कर्ष महिला सेवा सहकारी मंडली लिमिटेड के निर्माण में मंजुला की सहायता करती हैं। वहीं जब मंजुला के पति का निधन हो गया और अपने पीछे वह एक बेटे को छोड़कर इस दुनिया से चले गए, पर यह हादसा भी मंजुला को उसके मार्ग से नहीं भटका पाई। विज्ञान में टॉपर महिला करती थी सफाईकर्मी का काम, मेहनत और लगन से बनी कीट वैज्ञानिक

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि मंजुला ने अपने व्यवसाय के लक्ष्य की कमान संभाले रखी थी और किसी के लिए भी कहने को कुछ नहीं था और कोई भी मंजुला को इससे प्रथक नहीं कर सकता था। जल्द ही सौंदर्य मंडली को उनका सर्वप्रथम ग्राहक नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ डिज़ाइन मिल गया था। उन्होंने संस्थान, भवनों और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के संगठनों को अपनी सेवाएं प्रदान करना प्रारंभ किया। उन्होंने गुजरात के अंतरराष्ट्रीय इवेंट वाइब्रेंट को भी सफाई की सेवा प्रदान की। चीथड़ों से कचरा एकत्रित करने वाली सौंदर्य मंडली ने अब एक लंबा रास्ता तय किया था। वे बहुत सारे आधुनिक उपकरणों और प्रौद्योगिकी का भी उपयोग करते हैं, जैसे हाई-जेट प्रेशर, माइक्रो-फाइबर मॉप्स, स्क्रबर्स, एक्सट्रैक्टर्स, फ्लोर क्लीनर्स, रोड क्लीनर्स आदि। आजकल बड़ी कंपनियां और संगठन सफाई के कार्य और अनुबंधों हेतु इ-टेंडर्स इशू करती है, जो मण्डली के लिए थोड़ा कठिन है। वे इस दिक्कतों का समाधान के लिए ऐसे लोगों को रोजगार पर रख रही हैं, जिनको इन सब बातों की जानकारी हो। इन सब के मध्य मंजुला यह सुनिश्चित करती थी कि उसके बेटे का बचपन उस प्रकार से ना बीते जिस प्रकार से उनका बचपन गुज़रा और वह अपने बेटे के मेडिकल विद्यालय के लिए भरपूर धनराशि एकत्रित कर ले। मंजुला और उसके बेटे के संघर्ष की अविश्वसनीय कहानी के लिए उसके महाविद्यालय ने उन्हें सम्मानित भी किया है। इस जानकारी के संबंध में आप लोगों की क्या प्रतिक्रियायें है। मित्रो अधिक रोचक बाते व लेटेस्‍ट न्‍यूज के लिये आप हमारे पेज से जुड़े और अपने दोस्तो को भी इस पेज से जुड़ने के लिये भी प्रेरित करें।

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