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पैदा होते ही माँबाप ने अनाथ आश्रम में छोड़ा,फिर दूसरे ने ऐंड्रू सायमंड्स को गोद लेकर बदली किस्मत

मित्रों खेल की दुनिया में बहुत सी ऐसी खेल प्रतियोगितायें है, जिन्हें लोगों द्वारा काफी पसन्द की जा रही है। इस संबंध में वहीं अगर भारत की बात की जाये, तो यहां क्रिकेट को लेकर एक अलग ही दिवानगी देखने को मिलती है। क्‍योंकि हमारे देश में क्रिकेट प्रेमी कोई भी मैच देखने से कभी नही चूकते है। वहीं अगर बात की जाये क्रिकेटरों की तो ये अक्सर किसी न किसी वजह से हमेशा ही सुर्खियों में बने रहते है। इसी क्रम में आज हम एक ऐसे क्रिकेटर की बात करने वाले है जिनके खुद के माता-पिता ने छोड़ा, और दूसरे ने अनाथ आश्रम से गोद लिया। फिर बन गया था इतना बड़ क्रिकेटर, हालाकि आज हमारे बीच यह दिग्गज खिलाड़ी नही रहा, क्योंकि एक कार दुर्घटना में इनका हालही में निधन हो चुका है।

आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलियाई के पूर्व ऑलराउंडर ऐंड्रू सायमंड्स के निधन से क्रिकेट जगत सदम में है। सिर्फ 46 साल की उनकी उम्र में कार दुर्घटना में उनका निधन हो गया। अपने गृहराज्य क्वींसलैंड में ही रात करीब 11 बजे उनकी कार का ऐक्सीडेंट हो गया। उनके इस तरह जाने से टीम के पूर्व साथी और बाकी दुनिया के क्रिकेटर भी सदम में हैं। सायमंड्स अपने खेल के अलावा कई विवादों को लेकर भी चर्चा में रहे। साल 2008 में उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया था जब वह टीम मीटिंग छोड़कर मछली पकड़ने चले गए थे। सायमंड्स का जन्म 9 जून 1975 को यूनाइटेड किंगडम के बर्मिंगम में हुआ। उनके माता पिता एफ्रो-कैरेबियन और स्वीडिश या डेनिश थे। लेकिन उन्होंने बच्चे को छोड़ दिया था। और अडॉप्शन के लिए दे दिया था। इसके बाद केन और बारबरा सायमंड्स ने उन्हें गोद लिया। ये दोनों स्कूलटीचर्स थे। सायमंड्स सिर्फ तीन महीने के थे, जब उन्हें गोद लिया गया। हाल ही में ब्रेट ली के पॉडकास्ट में उन्होंने बताया था, ‘मैं एक गोद लिया हुआ बच्चा हूं, ठीक है, तो असल में मैं नहीं जानता कि मेरे कुदरती माता-पिता कौन हैं। मैं उन्हें कभी नहीं मिला।’ उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन जब मैं छह सप्ताह का था तो मेरे माता-पिता क्लीनिक गए और उन्होंने एक बच्चा गोद लेने के लिए अप्लाई किया। तो उस तरह जैसा होता था, वे मुझे एक सप्ताह के लिए अपने घर ले गए और आजमाया। आप इसे एक तरह की टेस्ट ड्राइव कह सकते हैं।’

उन्होने उस शो में कहा था, ‘मां मुझे कहानी सुनाया करती थी कि जब वे मुझे एक सप्ताह के लिए लेकर आए थे तो मैं बहुत ज्यादा रोता था। और एक सप्ताह बाद क्लिनिक जाकर जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने मुझे एक फरिश्ता बताया और कहा कि वे मुझे रखना चाहेंगे।’ सायमंड्स ने कहा, ‘तो उन्होंने सारे पेपरवर्क किए और मैं ऐंड्रू सायमंड्स बन गया। केनिथ वॉल्टर सायमंड्स और बारबरा सायमंड्स के बेटे के रूप में उनके घर गया।’ इसके बाद उनका परिवार इंग्लैंड से ऑस्ट्रेलिया आ गया। पहले विक्टोरिया में रहा और फिर क्वींसलैंड में शिफ्ट हो गया। सायमंड्स ब्रिटेन में पैदा हुए थे और एफ्रो-कैरेबियन थे, तो यानी वह इंग्लैंड और वेस्टइंडीज किसी के लिए भी खेल सकते थे। लेकिन उनका पहला और एकमात्र प्यार व पसंद ऑस्ट्रेलिया ही था। क्रिकेट से उनका परिचय उनके पिता ने करवाया जो खेल के दीवाने थे। सायमंड्स ने कहा था, ‘पिता क्रिकेट के लिए पागल थे। वह सप्ताह में पांच-छह दिन स्कूल जाने से पहले व बाद में मुझे थ्रोडाउन करवाया करते थे।’ सायमंड्स ने पहली बार सही तरीके से क्रिकेट टाउन्सविले वॉन्डर्स जूनियर क्लब के लिए खेला। उनके पिता सप्ताह में दो बार 270 किलोमीटर की ड्राइव करते ताकि सायमंड्स ट्रेनिंग ले सकें और मैच खेल सकें। इसके बाद परिवार गोल्ड कोस्ट शिफ्ट हुआ जहां ऐंड्रू की पढ़ाई जारी रही और उनके पिता स्कूल में काम करने लगे। 1994 में सायमंड्स ने क्वींसलैंड के लिए डेब्यू किया। और यहां उन्होंने खेल से जानकारों का दिल जीत लिया। 1998 में पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की जर्सी पहनी। 2003 वर्ल्ड कप के दौरान शेन वॉटसन के चोट लगने के कारण उन्हें टीम में शामिल किया गया। इंग्लैंड में वह चार काउंटी- ग्लास्टशर, केंट, लंकाशर और सरे के लिए खेले। इंडियन प्रीमियर लीग में 2008 में डेक्कन चार्जर्स की टीम ने उन्हें खरीदा था। इस जानकारी के संबंध में आप लोगों की क्या प्रतिक्रियायें है। मित्रो अधिक रोचक बाते व लेटेस्‍ट न्‍यूज के लिये आप हमारे पेज से जुड़े और अपने दोस्तो को भी इस पेज से जुड़ने के लिये भी प्रेरित करें।

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