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रिजल्ट में एक नम्बर कम आया तो लड़के ने बोर्ड पर किया केस, 3 साल बाद बढवाए पुरे 28 नंबर

मित्रों इस बात में तो कोई दो राय नही है कि इस दुनिया में हर व्‍यक्ति के लिये शिक्षा बहुत ही महत्‍वपूर्ण स्‍थान रखती है, अगर शिक्षा की बात करें तो आज के समय में शिक्षा ग्रहण करना भी एक बहुत ही बड़ी बात है, कारण यह है कि शिक्षा के लिये पैसों का होना भी बहुत आवश्‍यक होता है, कई ऐसे लोग होते है जो कि पैसो की कमी होने के कारण अपनी पढ़ाई पर रोक लगा देते है, और कुछ काम करने में लग जाते है पर कुछ ऐसे भी होते है जो हिम्‍मत न हारकर संघर्ष में जुटे रहते है। इसी क्रम में आज हम एक ऐसे शख्स की बात करने वाले है, जिनके रिजल्ट में 1 नम्बर कम आया तो बोर्ड को ही घसीटा कोर्ट में फिर 3 साल बाद 28 नम्बर मिलें। खबर विस्तार से जानने के लिये इस पोस्ट के अंत तक बने रहे। पहले करता था कुली का काम, अब फ्री WIFI से पढ़कर बन गया IAS ऑफीसर 

दरअसल हम जिस शख्स की बात कर रहे है वो जिला सागर मध्यप्रदेश का रहने वाला है। जिनका नाम शांतनु शुक्ला है। इनकी कहानी उन बच्चो के लिए प्रेरणा है जो बोर्ड में कम नंबर आने पर घर बैठ जाते है। वजह? वो सिर्फ़ एक नंबर के लिए मध्य प्रदेश बोर्ड को हाई कोर्ट तक खींच कर ले गया। तीन साल क़ानूनी लड़ाई लड़ी और अपने पक्ष में फैसला करवा लिया। आपको बता दें कि सागर जिले के कबीर मंदिर के पास परकोटा के रहने वाले हेमंत शुक्ला के बेटे शांतनु शुक्ला ने यहां के एक्सीलेंस स्कूल 12वीं की है। उन्होंने 2018 में MP बोर्ड से 12वीं की परीक्षा दी थी जिसमें वह 74.8 फीसदी नंबरों से पास हुए थे। शांतनु अपनी परीक्षा तैयारियों को लेकर इतने आत्मविश्वास में थे कि उन्हें पूरी उम्मीद थी कि उन्हें 75 से 80 फीसदी के बीच मार्क्स आएंगे। पर जब रिजल्ट आया तो उन्हें ओवरलऑल 75 फीसदी नंबर मिले। इस वजह से शांतनु मुख्यमंत्री मेधावी योजना का लाभ पाने से रह गए। यह बात शांतनु के मन में घर कर गई और उन्होंने रीटोटलिंग के लिए अपील कर दी। लेकिन रीटोटलिंग के बाद भी रिजल्ट जस का तस आया। लड़की की जिद के आगे झुका भारतीय रेल, एक सवारी के लिए चलाई 555 किमी गाड़ी

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि दैनिक भास्कर में छपी एक रिपोर्ट की माने तो 12वीं के मार्कशीट में 1 नंबर बढ़वाने के लिए शांतनु माध्यमिक शिक्षा मंडल को हाई कोर्ट लेकर गए। उन्होंने तीन साल लंबी लड़ाई लड़ी और उनके केस की 44 पेशियां हुई। इस दौरान केस लड़ने में शांतनु के 15 हज़ार रुपये ख़र्च हुए। शांतनु ने बताया कि आखिरकार ,कोर्ट ने बोर्ड को दोबारा चेकिंग करने के आदेश दिए। तीन साल चले केस के बाद हाई कोर्ट ने शांतनु के हक़ में फ़ैसला सुनाया और माध्यमिक शिक्षा मंडल को दोबारा चेकिंग के आदेश दिए। रि-चेकिकिंग में शांतनु के 1-2 नहीं बल्कि पूरे 28 नंबर बढ़ाने का आदेश दिया है। शांतनु की कॉपियों की दोबारा जांच हुई और नई मार्कशीट में उन्हें 80.4% मार्क्स मिले। शांतनु ने बताया कि वो अब दोबारा मेधावी छात्र योजना में अप्लाई करेंगे।  शांतनु ने साबित कर दिया कि ख़ुद पर आत्मविश्वास हो तो कोई इंसान कुछ भी कर गुज़र सकता है। इस जानकारी के संबंध में आप लोगों की क्या प्रतिक्रियायें है। मित्रो अधिक रोचक बाते व लेटेस्‍ट न्‍यूज के लिये आप हमारे पेज से जुड़े और अपने दोस्तो को भी इस पेज से जुड़ने के लिये भी प्रेरित करें।

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