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अब बहेगी दूध की नदियां,भैंस की पूछ के टुकड़े से पैदा किये कटड़ा-कटडी के क्लोन

मित्रों इस दुनिया में बहुत सी अजीबो-गरीब घटनाये घटित होती रहती है, जिनमें हमे कुछ की जानकारी हो पाती है तो कुछ की नही, क्योंकि यह दुनिया बहुत बड़ी है इस दुनिया में कई चीचें हर दिन घटती रहती है। हालांकि इस संबंध में हमारे वैज्ञानिक निरंतर रहस्यमयी चीजों को लेकर खोज करते रहते है, साथ ही कुछ अजीब परीक्षण भी करते रहते है। आज हम एक ऐसे ही परीक्षण के संबंध में बात करने वाले है, जिसमे भैंस की पूछ के टुकड़े से पैदा किया कटड़ा व कटड़ी के क्लोन। फिर बैज्ञानिक बोले अब बहेंगी दूध की नदियां। खबर विस्तार से जानने के लिये इस पोस्ट के अंत तक बने रहे है।

दरअसल वैज्ञानिकों का कहना है कि क्लोनिंग में उत्तम नस्ल की मुर्रा भैंस का प्रयोग किया जाता है, जिसकी जेनेटिक क्षमता ज्यादा दूध देना होती है, ऐसे में सामान्य भैंस के मुकाबले क्लोन पशु के सिमन से पैदा होने वाली भैसों में दूध उत्पादन 14 से 16 किलो प्रति दिन होता है। आपको बता दें हरियाणा के करनाल में राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने क्लोनिंग के क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल की है, पहली बार भैंस की पूछ के दो टुकड़ों से क्लोन calf पैदा किया गया है, वैज्ञानिकों का दावा है इससे देश में दूध का उत्पादन दोगुना होगा, किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी, वर्ष 2009 से अब तक NDRI 11 क्लोन का पैदा कर चुके हैं जिसमें 7 मेल क्लोन 4 फीमेल क्लोन शामिल है, ऐसा दावा भी किया जा रहा है क्लोनिंग की सफलता के पश्चात दूध उत्पादन दोगुना होगा साथ ही किसानों की आय भी बढ़ जाएगी। केंद्र सरकार के अप्रूवल के बाद इस तकनीक को किसानों तक पहुंचाया जाएगा, करनाल के राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान के निदेशक डॉक्टर एमएस चौहान का कहना है कि यह क्लोनिंग के क्षेत्र में एक और सफलता है, वैज्ञानिको की रिसर्च सही दिशा में आगे बढ़ रही है, इसके बाद उन्होंने बताया भारत के कृषि अर्थव्यवस्था में पशुपालन का पहला स्थान है, भैंस का कोई दूध उत्पादन में लगभग 50% का योगदान है।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि क्लोनिंग किए गए पशुओं के दूध उत्पादन दोगुना हो सकता है, डॉ एमएस चौहान ने बताया क्लोन तकनीक से एक बच्चा 26 जनवरी को पैदा हुआ इसलिए उसका नाम गणतंत्र रख दिया गया, दूसरे क्लोन कटड़ी का नाम करणीका है जो कण नगरी के नाम पर है।  एक भैंस की पूंछ से लिए गए सिमन से पैदा हुआ है, दूसरे का जन्म मेल सिमन से किया गया है, डॉ चौहान का कहना है कि क्लोनिंग में उत्तम नस्ल के मुर्रा भैंस का प्रयोग किया जाता है. जिसकी जेनेटिक क्षमता ज्यादा दूध देना होती है. ऐसे में सामान्य भैंस के मुकाबले क्लोन पशुओं सिमन से पैदा होने वाली भैसो में दूध उत्पादन 14 से 16 किलो प्रति दिन होता है. सामान्यतः भैसे  6 से 8 किलो दूध प्रतिदिन उत्पादन की क्षमता देखी गई हैं.आपको बता दें किलोन तकनीक से पैदा हुए कटरा और कटरी पूरी तरह स्वस्थ हैं. इनका व्यवहार पूरी तरह सामान्य है. डॉक्टर चौहान ने बताया कि क्लोनिंग से 11 बच्चे पैदा हो चुके हैं. जो जीवित हैं इनका परिवार धीरे-धीरे बड़ा हो रहा है.

यह तकनीक पूरी तरह से भारत की है.टीम में शामिल पशु वैज्ञानिक डॉ नरेश ने कहा कि एनडीआरआई में किए गए परीक्षण निश्चित रूप से प्रौद्योगिक को किसानों के दरवाजे तक पचाने में मदद करेंगे.ताकि उनके पशुओं का उत्पादन बढ़ाया जा सके. यह दोनों उच्च दूध देने वाली भैंस के क्लोन जिस की पैदावार आपने पांच में स्तनपान में 6000 किलोग्राम दर्ज की गई है. डॉ मनोज कुमार और कुमारी रिंका का कहना था एक क्लॉन भैंस से 1 वर्ष में 10 बच्चों का जन्म हो सकता है जो दूध के क्षेत्र में एक नई क्रांति होगी। इस जानकारी के संबंध में आप लोगों की क्या प्रतिक्रियायें है। मित्रो अधिक रोचक बाते व लेटेस्‍ट न्‍यूज के लिये आप हमारे पेज से जुड़े और अपने दोस्तो को भी इस पेज से जुड़ने के लिये भी प्रेरित करें।

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