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बेटियों ने निभाया बेटो का फर्ज़ पिता की अर्थी को कंधा देकर किया अंतिम संस्कार,भाई को पास फटकने तक न दिया

दोस्तो हिंदू धर्म के अनुसार ऐसे बहुत से कार्य है जो पुत्र को करने होते है और ये परंपरा सदियों से चली आ रही है ।लेकिन बदलते समय के साथ इन परंपराओ में भी बदलाब देखने को मिला है । जैसे हिंदू धर्म के अनुसार महिलाओ को शमशान घाट में जाने की मनाही है लेकिन कभी कभी हालात ऐसे बन जाते है की बेटियों को वो सभी फर्ज निभाने पड़ते है जो एक बेटे के होते है आज हम आपको ऐसे ही मामले के बारे में बताने वाले है जिसमे बेटियो ने भाई के होते हुए अपने पिता की अंतिम यात्रा में अर्थी को दिया कंधा और भाई को पिता के आसपास भी फटकने नहीं दिया ।क्या है पूरा मामला जानने के लिए खबर को अंत तक जरूर पढ़े।

4 बहनों ने पिता की अर्थी को दिया कंधा, अंतिम संस्कार में भाई को फटकने तक न दिया

इस मामले के बारे में बताया गया की जिले के नवाबाद थाना क्षेत्र के डडियापुरा गल्ला मंडी रोड निवासी गौरेलाल साहू की बीते शुक्रवार को हार्ट अटैक आने से मृत्यू हो गई थी. तब पिता की मौत की सूचना मिलते ही चारो बेटियां पुत्र का फर्ज निभाने के लिए सीधे पिता के घर दौड़ी चली आई. और नम आंखों से बेटियों ने पिता को अंतिम विदाई दी. उनके शव को कंधा दिया.

इसके बाद बेटियों ने ही पिता की अर्थी को पुरे विधि -विधान के साथ मुक्तिधाम तक पहुचाया और फिर पुरे रीती -रिवाजो के साथ चारो बेटियों ने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया | लेकिन जब बेटियों ने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया तो वहां खड़े लोग हैरान हुए क्योकि परंपरा के अनुसार पिता को मुखाग्नि पुत्र देता है |

इस वजह से बेटियों को ने पिता की अर्थी को दिया कन्धा:- जानकारी के लिए जब मृतक की बेटी से पूछा गया की, भाई के होते हुए भी आप लोगों ने पिता की अर्थी को कंधा क्यों दिया? तब उन चार लडकिय ने उसके बारे में विस्तार से बताया और कहा की उनका भाई पिता के साथ लड़ाई करता था और आए दिन उनको बहुत प्रताड़ित भी किया करता था. तो इसलिए ही चारों बहन ही पिता की मिलकर देखभाल करती थीं. और जब पिता का निधन हुआ तो भी सभी बहनों ने तय किया कि भाई को शव को हाथ नहीं लगाने देंगे.

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