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प्रेम चोपड़ा की हरकतों से परेशान सरकार को मजबूरन करना पड़ा था हस्तक्षेप

मित्रो आज हम बात करने जा रहे है 70 के दशक बालीवुड अभिनेता और अपने समय के मशहूर विलेन प्रेम चोपड़ा की .  उन्होंने अपने पूरे करियर में सैकड़ो फिल्मो में काम किया है और वह ज्यादातर खलनायक की भूमिका निभाते हुए नजर आये है.फिल्म में कई सीन ऐसे होते है जिन्हें शूट करना आसान नही है फिर भी फिल्म की डिमांड के लिए ऐसे सीन फिल्माए जाते है .ये सीन इतने रियल लगते है कि दर्शक उन्हें सच मानकर विलेन को गालिया देने लगते है और उन्हें रियल लाइफ में भी बुरा इंसान मानने लगते है . विलेन अक्सर हीरो से लड़ते हुए नजर आते, तो कभी हीरो की बहन,पत्नी या प्रेमिका की इज्जत के साथ खिलवाड़ करते  नजर आते हैं.प्रेम चोपड़ा ने भी अपनी फिल्मो में ज्यादातर बलात्कार के सीन्स किये है .जिसकी वजह से सरकार को भी करना पड़ गया था  हस्तक्षेप.खबर को विस्तार से जानने के लिए बने रहे लेख के अंत तक.

प्रेम चोपड़ा ने किये थे ऐसे बलात्कार सीन्स कि सरकार को करना पड़ा था हस्तक्षेप

जी हाँ और प्रेम ने उस समय की कुछ सबसे बड़ी एक्ट्रेसेस की फिल्मों में बलात्कार सीन्स को भी शूट किया है और उन्होंने एक बार कहा था कि उनके रोल्स के बारे में कहने के लिए उनके पास कुछ भी नहीं है। इसी के साथ ही प्रेम चोपड़ा के बलात्कार सीन्स पर सरकार ने भी हस्तक्षेप किया था। जी दरअसल रकिता नंदा की फिल्म ‘प्रेम नाम है मेरा’ में प्रेम चोपड़ा ने बलात्कार के सीन्स की शूटिंग और उनके कुछ एपिसोड के बारे में बात की थी।

जी हाँ और ऐसी ही एक घटना को याद करते हुए जब एक एक्ट्रेस ने उन्हें किस करने से मना कर दिया, तो उन्होंने कहा, ‘एक टॉप एक्ट्रेस थी जिसका एक एक्टर से रिलेशन भी था। एक शॉट के लिए मुझे उसे किस करना था और शुरू में वह तैयार थी। हालांकि, उसका प्रेमी सेट पर था जब हम शूटिंग के लिए तैयार थे और वह उसे मना करने लगा।’ वहीं उन्होंने आगे कहा, ‘इसलिए जब भी मैं उसके चेहरे के करीब आता तो वह मुड़ जाती। यह चलता रहा, टेक के बाद टेक, जब तक कि मैं मजाक में चिल्लाया, ‘व्हाट द हेल! हम खलनायकों को चट्टानों से फेंक दिया जाता है, गोली मार दी जाती है और सभी हीरोज पीट देते हैं। कम से कम हमें छोटी-छोटी चीजों का आनंद मिलना चाहिए। अंत में वो शॉट लिया गया और मेकर्स की सांस में सांस आई।’

इसी के साथ प्रेम ने ये भी कहा कि अक्सर फिल्म में दुष्कर्म की हरकत नहीं दिखाई जाती। यह आवाजों और तेज म्यूजिक के जरिए एक बंद दरवाजे तक पहुंचाया जाता था। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि इतने सारे मेकर्स ने अपनी फिल्मों में बलात्कार के सीन्स को बिना जरूरत के भी रखना शुरू कर दिया था कि सरकार को आखिर में हस्तक्षेप करना पड़ा। वहीं उन्होंने यह भी कहा था, ‘मुझे वास्तव में स्क्रीन पर ये सभी गंदी चीजें करना पसंद नहीं है। हिंसा और सेक्स सीन्स के कई फेज हो सकते हैं, लेकिन मैं पूरी तरह से ऐसी हिंसा या बॉक्स ऑफिस बूस्टर के रूप में सेक्स को रखने के खिलाफ हूं।’ जी दरअसल साल 1970 के दशक तक फिल्ममेकर्स को सरकार ने पहले ही हिंसा और बलात्कार के सीन्स को कम करने के लिए कहा था। केवल यही नहीं बल्कि जो फिल्में पहले से ही फ्लोर पर थीं, उन्हें केंद्र के नए निर्देश के हिसाब से करने को कहा।

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