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लड़की की जिद के आगे झुका भारतीय रेल, एक सवारी के लिए चलाई 555 किमी गाड़ी

दोस्तों ये बात तो सब मानते है कि महिलाएं किसी भी  काम  में  किसी से अब पीछे नही .हर परिस्थिति का सामना करना उन्हें भलीभांति आता है .महिलाओ ने ये साबित कर दिया है कि वो अपने काम के साथ -साथ घर परिवार की जिम्मेदारी को भी अच्छे से उठा सकती है .आजकल की महिलाये तो देश चलाने का जज्बा रखती है और अपनी बात मनवाना उन्हें अच्छे से आता है .जिसका एक उदाहरण हम आपके सामने पेश कर  रहे है .आज हम आपको एक लड़की के बारे में बताने वाले है . जिसके सामने भारतीय रेलवे ऑफिसर भी सिर झुकाने के लिए हुए मजबूर .पूरा मामला जानने के लिए खबर को अंत तक पढ़े .कभी स्टेशन पर करता था कुली का काम ,फ्री WIFI से पढ़के बन गया अफसर

जिस महिला ने भारतीय रेलवे ऑफिस को सिर झुकाने जाने के लिए विवश कर दिया उस लड़की का नाम अनन्या है.जोकि बीएचयू से लॉ की पढ़ाई कर रही है. उस लड़की का कहना है कि मैंने रांची के लिए ट्रेन की टिकट बुक करवाई है तो मैं बस और कार से यात्रा नहीं करूंगी. जब से यह बात लोगों को पता चली है तब से लोग अनन्या के हिम्मत और साहस की तारीफ करते थक नहीं रहे. यह घटना दिल्ली रेलवे स्टेशन की है. अनन्या ने अपनी हिम्मत और साहस का परिचय देते हुए भारतीय रेलवे ऑफिसर को भी सिर झुकाने के लिए विवश कर दिया. और राजधानी एक्सप्रेस को एक यात्री के लिए 535 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ी. राजधानी एक्सप्रेस में अनन्या के साथ 929 अन्य यात्री सफर कर रहे थे. सभी लोग अनन्या की बात से सहमत हैं. सब का मानना था कि अनन्या बिल्कुल सही कह रही है. अगर हमने रांची के लिए टिकट बुक करवाई है तो ट्रेन को हमें रांची के स्टेशन पर छोड़ना चाहिए. अनन्या की बात पर अन्य यात्री सहमत तो थे लेकिन वह उस लड़की की तरह अपनी बात रखना और संघर्ष करना नहीं चाहते थे. इसलिए राजधानी एक्सप्रेस में मौजूद अन्य व्यक्ति रांची के लिए बस से रवाना हो चुके थे. अनन्या के साथ सफर करने वाले अन्य यात्री डाल्टेनगंज उतरकर बस से रांची जाने के लिए रवाना हो चुके थे. लेकिन यह बात अनन्या को बिल्कुल भी मंजूर नहीं थी. अपनी जान की परवाह किये बिना भारत के वीर ने बचाई पाकिस्तान की लड़की,लोग कह रहे है ये है असली वीर जारा

इस बात की शिकायत उन्होंने भारतीय रेलवे ऑफिसर से की. शिकायत करने के बाद रेलवे अधिकारियों ने अनन्या के लिए कार का इंतजाम भी किया. लेकिन उन्होंने कहा कि कार का सफर तो मैं पहले कर सकती थी. लेकिन टिकट तो मैंने रांची की बुक करवाई है. इसलिए मैं रांची तक का सफर ट्रेन से करना चाहती हूं. रेलवे अधिकारियों ने 8 घंटे तक अनन्या से बातचीत की.रेलवे अधिकारियों ने अनन्या को बहुत समझाया लेकिन वह लड़की अपने बात पर टिकी रही. अनन्या अपनी बात पर टिकी रही उसका कहना है कि मैंने ट्रेन के लिए टिकट बुक करवाई है तो मुझे ट्रेन से सफर करना है.अनन्या की जीद पर भारतीय रेलवे अधिकारी भी सिर झुकाने के लिए विवश हो गए. अनन्या के संघर्ष के बाद जब रेलवे विभाग के चेयरमैन को पता चली तो, उन्होंने लड़की की बातों को सही मानते हुए राजधानी एक्सप्रेस को एक यात्री के लिए 535 किलोमीटर की यात्रा करने की आज्ञा दी. अनन्या रात को 1:45 तक रांची पहुंची.अनन्या के संघर्ष से यह शिक्षा मिलती है कि व्यक्ति को अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए. और इसी के साथ अनन्या का यह संगठन लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है.राजधानी एक्सप्रेस में अनन्या के साथ यात्रा करने वाले व्यक्तियों ने आसान तरीका चुना, किसी ने भी रेलवे अधिकारियों को उनकी गलती के बारे में ऐसा नहीं करवाया. और अनन्या ने 8 घंटे के संघर्ष से दुनिया के सामने एक मिसाल खड़ी कर दी है.

 

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