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इंदिरा गांधी ने निकलवाया राजस्थान के जयगढ़ किले का खाजाना, अरवो के खजाने को ट्रकों में भर कर ले गयी साथ

मित्रों इसमें कोई दो राय नही है कि हमारी इस पृथ्वी के गर्भ में कई ऐसे नायाब तत्व है, जिनके संबंध में शायद ही कभी किसी को पता हो पायेगा। हालांकि वैज्ञानिकों द्वारा इस संबंध में निरंतर खोज होती रहती है। इसी के चलते खुदाई के दौरान पिछले वर्ष 3000 टन से भी अधिक सोना सोनभद्र में निकाला गया था। जिसका प्रयोग मौजूदा सरकार भारत के उत्थान के लिये बखूबी कर रही है, पर 1975-76 के मध्य देश में आपातकाल लगा हुआ था, इसी दौरान आयकर विभाग ने जयपुर राजघराने के महलों पर छापे मारे और सेना ने इस किले की तलाशी ली, इस दौरान इंदिरा गांधी ने जयगढ़ किले से अरबों का खजाना निकाला था और ट्रकों में भरकर भेजा?

दरअसल केंद्र ने सेना की मदद लेकर खजाने की खोज में कुछ महीनों तक दुर्ग में खुदाई कराई, यह वही खजाना था जो राजा मानसिंह अफगानिस्तान पर हमला कर लाए थे, आखिर एक दिन जयपुर-दिल्ली हाईवे को बंद कर दिया गया, तब चर्चा रही कि केंद्र ने लोगों को धोखे में रखकर खजाना उस बंद हाईवे से ट्रक भरकर दिल्ली पहुंचाया है इसके बउजूद तत्कालीन सरकार ने स्पष्ट तौर पर मना कर दिया कि उन्हें किले से कोई खजाना नहीं मिला हैं, तब सवाल उठा कि खजाना नहीं मिला तो गया कहां ? कई लोगों ने आरटीआई लगाकर सरकार से खजाने के बारे में जानना चाहा, लेकिन विभागों द्वारा इस सम्बन्ध में उनके पास कोई सूचना न होने का हवाला हर बार दिया जाता रहा, हालाकि इतिहासकार बताते हैं कि अकबर के दरबार में सेनापति जयपुर के राजा मानसिंह (प्रथम) ने मुगल शहंशाह के आदेश पर अफगानिस्तान पर हमला किया था, उसी अफगानिस्तान पर, जहां अब तालिबान ने कब्जा कर रखा है, तब उस इलाके को जीतने के बाद राजा मानसिंह को काफी धन-दौलत मिली, उन्होंने इसे दिल्ली दरबार में सौंपने की बजाय अपने पास ही रख लिया, जयगढ़ किले के निर्माण के बाद कहा जाने लगा कि इसमें पानी के संरक्षण के लिए बनी विशालकाय टंकियों में सोना-चांदी और हीरे-जवाहरात छिपाकर रखे गए हैं।

आपकी जानकारी के लिये श्ह भी बताते चले कि जयगढ़ किले में खजाने की बात देश को आज़ादी मिलने के बाद भी अक्सर चर्चा में आती रही, इस वक्त जयपुर राजघराने के प्रतिनिधि राजा सवाई मान सिंह (द्वितीय) और उनकी पत्नी गायत्री देवी थे, ‘स्वतंत्र पार्टी’ के सदस्य ये दोनों लोग कांग्रेस के धुर विरोधी थे, गायत्री देवी तीन बार जयपुर से कांग्रेस के प्रत्याशी को हराकर लोकसभा सदस्य भी बन चुकी थीं, इसलिए इस दौरान राजघराने के कांग्रेस पार्टी से संबंध काफी खराब चल रहे थे। देश में आपातकाल लगा तब गायत्री देवी ने इसका मुखर विरोध किया, इंदिरा गांधी सरकार ने इसी वजह से आयकर विभाग को राजघराने की संपत्ति की जांच के आदेश दे दिए, 1976 में सरकार की इस कार्रवाई में सेना की एक टुकड़ी भी शामिल थी, इसे जयगढ़ किले में खजाना खोजने की जिम्मेदारी सौंपी गई, उस समय सेना ने तीन महीने तक जयगढ़ किले और उसके आसपास खोजी अभियान चलाया, खजाना खोजी अभियान के बाद सरकार ने औपचारिक रूप से बताया कि किले से किसी तरह की संपत्ति नहीं मिली, बाद में सेना के भारी वाहनों को दिल्ली पहुंचाने के लिए जब दिल्ली-जयपुर राजमार्ग एक दिन के लिए बंद किया गया तो यह चर्चा जोरों से चल पड़ी कि सेना के वाहनों में राजघराने की संपत्ति है, लेकिन बाद में इस बात की कभी पुष्टि नहीं हो पाई और अभी तक यह बात एक रहस्य ही है। इस जानकारी के संबंध में आप लोगों की क्या प्रतिक्रियायें है। मित्रो अधिक रोचक बाते व लेटेस्ट न्यूज के लिये आप हमारे पेज से जुड़े और अपने दोस्तो को भी इस पेज से जुड़ने के लिये भी प्रेरित करें।

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