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बच्चो को अफसर बनाने के लिए स्टेशन पर करती है कुली का काम

जीवन में हालत इन्सान से क्या कुछ नही करवाता. जीवन में सुख दुःख तो आते जाते रहते है.नारी को कोमल समझने वालो को पता चलेगा नारी कितनी शक्तिवान है. वो कभी हालातो से हार नही मानती और जब बात उसके बच्चो की हो तो वो कुछ भी कर सकती है आज हम आपको ऐसी ही एक महिला के बारे में बता रहे है .

संध्या एक ऐसी महिला कुली जो 45 आदमियों के बीच अकेले करती है काम, इज्जत से कमाती है, बच्चों को बनाना चाहती है  अफसर । आपने ऐसी बहादुर महिला पहले नहीं देखी होगी जो इतनी कठनाई से अपना जीवन चलाती है और शान से कमाती है।  और अपने घर को चलाती है और साथ ही साथ अपने बच्चे को भी पढ़ाती है ।  तो चलिए जानते है आखिर कौन है ये महिला और कैसे इतनी मेहनत कर अपना जीवन व्यापन करती है। इस लेख में आपको पता चलेगा की असल महिला सकती क्या होती है।

आजकल की महिलाएं इतनी समझदार होते जा रही है कि वह अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेती है और खुद का पेट अपने मेहनत से भारती है। ऐसे ही एक महिला के बारे में आज मैं आपको बताने जा रही हूं। जो लोगों के लिए एक प्रेरणा बन चुकी है। यह ऐसी महिला है जो ना की खुद के लिए बल्कि अपने बच्चों और सास की भी देखभाल खुद अपने बल पर करती है। यह स्टेशन पर बड़े ही गर्व के साथ कुली का काम करती है।

इस महिला का नाम संध्या है और यह 31 वर्ष की है। इस काम को उन्हें मजबूरी में करना पड़ता है ताकि वह अपने परिवार की जरूरतों की चीजों को पूरा कर सके। और दूसरी मजबूरी उनकी यह है कि उनके पति इस दुनिया में नहीं है। पहले वही थे जो मेहनत करते थे और घरवालों का पेट भरते थे। संध्या का कहना है कि भले ही उनका सपना टूट गया हो। उनका पति छिन गया हो। लेकिन वह अपने बच्चों को अच्छे से पढ़ा लिखा कर एक बड़ा अफसर बनाना चाहती है। इसके लिए वह कोई भी काम करने को तैयार है। वह कुली नंबर 36 है। इज्जत व मेहनत से कमाती है और खाती है। वह मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर काम करती है। उनके परिवार में एक बूढ़ी सास और तीन बच्चे हैं, जिनकी जिम्मेदारी उनके ऊपर है।

परंतु संध्या जब 30 वर्ष की थी तो वह भी दूसरे महिलाओं की तरह ही घर संभालती थी तथा बच्चों को संभालती थी। पर जब उनके जिंदगी में कठिनाइयां शुरू हुई यानी कि उनके पति भोलाराम जब बीमार हो गए और उसी बीमारी से उनकी मृत्यु हो गई। तभी से इन्होंने ठान लिया कि वह कोई भी काम मेहनत व लगन से करेंगी जिससे उन्हें पैसे मिलेंगे । उन्हें कोई और नौकरी नहीं मिलपाई इसीलिए उन्होंने कुली का काम करना शुरू कर दिया ।

संध्या मध्यप्रदेश के जबलपुर की रहने वाली थी । वह हर रोज नौकरी करने के लिए कुंडम से 90 किलोमीटर ट्रैवल करती थी। तब जाकर कटनी के रेलवे स्टेशन पर वह आ पाती थी । इसके बाद में दिन भर वह काम करती थी । उसके बाद फिर वह वापस घर चले जाती थी, इस तरह वह हर रोज अपना काम करती थी। साथ ही बच्चों के देखभाल भी करती थी ।

सिर्फ इतना ही नहीं उन्होंने यह भी बताया था कि जिस रेलवे स्टेशन पे वह काम करती है वहां पर 45 पुरुष कुली है और उन सबके बीच यह एक अकेली महिला कुली है, जो काम करती हैं। यह कुली नंबर 36 है।

संध्या के तीन बच्चे हैं जिनमें से पहले बच्चे का नाम है साहिल, वह 8 वर्ष का है । दूसरे बच्चे का नाम है हर्षित, वह 6 साल का है और तीसरे बच्चे का नाम पायल है जो कि 4 वर्ष की है । संध्या चाहती है कि उनके बच्चे एक बड़े ऑफिसर बने । इसलिए वह अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए जितने भी खर्च लगे वह करती हैं । संध्या के बच्चों के प्रती ममता को देखकर हर कोई दंग रह जाता है । लोग इस महिला को उनके स्वाभिमान और संघर्ष के लिए सलाम करते हैं ।

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