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आवाज सुरीली रखने के लिए इतनी मिर्ची खाती थी लता मंगेशकर…

मित्रों जैसा की आप सभी अवगत ही होगें कि बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार के निधन को अभी पूरा बॉलीवुड भूल भी नही पाया था कि एक और दुखद खबर ने सबको गमगीन कर डाला है। क्योकि साल 2022 के दूसरे महीने में ही एक और खबर ने पूरे बॉलीवुड को सक्ते में डाल दिया। जानकारी के मुताबिक देश की मशहूर गायिका व स्वरों की मलिका लता मंगेशकर का निधन बीते रविवार को हो गया है। उनके निधन से बॉलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। राजनीतिक दलों से लेकर बॉलीवुड से जुड़े दिग्गजों ने उनके निधन को अपूर्णीय क्षति बताया है। वहीं अगर इनकी सुरीली आवाज की बात की जाये तो इन्होंने बहुत से ऐसे गाने गाये है जिन्हे सुनने के बाद आज भी आंखों में आंसू आ जाया करते है। इसी क्रम में आज हम इनकी सुरीली आवाज के संबंध में कुछ खास जानकारी देने वाले है। अधिक जानकारी के लिये पोस्ट के अंत तक बने रहे है।

आपको बता दें लता जी के निधन के बाद उनके सभी चाहने वालों की आंखें उन्हें याद करते हुए भर आई है। संगीत से लेकर बॉलीवुड जगत तक में शोक की लहर दौड़ गई है। उन्होंने अपनी मधुर आवाज़ के ज़रिए करोड़ों लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई है। भारत रत्न लता मंगेशकर भारत की सबसे लोकप्रिय और आदरणीय गायिका हैं जिनका 6 दशकों का कार्यकाल उपलब्धियों से भरा पड़ा है। उनका जन्म 28 सितम्बर, 1929 को माध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ था। लता जी का पूरा नाम कुमारी लता दीनानाथ मंगेशकर है और उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर एक कुशल रंगमंचीय गायक थे। उन्होंने एक कमरे में अपना बचपन बिताया है। अपने पिता के सानिध्य में लता जी ने बचपन से ही संगीत की तालीम लेनी शुरू कर दी थी। उन्होंने संगीत सिखाना शुरू किया, जब वे पांच साल की थी। उनके साथ उनकी बहनें आशा, ऊषा और मीना भी सीखा करतीं थीं। लता ‘अमान अली ख़ान साहिब’ और बाद में ‘अमानत ख़ान’ के साथ भी पढ़ीं।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि करियर शुरू करते वक्त किसी ने उन्हें कह दिया था कि मिर्ची खाने से आवाज सुरीली हो जाती है। इसके बाद लता मंगेशकर रोज 10-12 मिर्च खाने लगी थीं। उन्हें जलेबी भी खाने में काफी पसंद है। वह इंदौर के सराफा की खाऊ गली के गुलाब जाबुन, रबड़ी और दही बड़े भी बहुत पसंद थे। लता जी के पिता साल 1942 में दुनिया को अलविदा कह गए। इस दौरान वह महज 13 साल की थीं। तब नवयुग चित्रपट फिल्म कंपनी के मालिक और इनके पिता के दोस्त मास्टर विनायक ने इनके परिवार को संभाला और लता मंगेशकर को एक सिंगर और अभिनेत्री बनाने में मदद की।

शुरुआत में कई संगीतकारों ने उनकी पतली आवाज के लिए गाने का काम देने से साफ मना कर दिया लेकिन इरादे की पक्की लता लगातार गाने में अपनी आवाज देने की कोशिश करती रहीं। धीरे-धीरे अपनी लगन और प्रतिभा के बल पर आपको काम मिलने लगा। लता जी को सर्वाधिक गीत रिकार्ड करने का भी गौरव प्राप्त है। फ़िल्मी गीतों के अलावा इन्होने ग़ैरफ़िल्मी गीत भी बहुत खूबी के साथ गाए हैं। वह अपने करियर में 30 हजार से ज्यादा गाने गा चुकी हैं।

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