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मुंबई में इंग्लिश के लेक्चरर हुआ करते थे कभी,आज चला रहे है ऑटो रिक्शा,दिल छु लेगी 74 साल के इस बुजुर्ग की कहानी

दोस्तों कभी किसी इंसान को उसके कपड़ो या काम से जज नही करना चाहिए . क्योकि समय एक जैसा नही रहता कभी कभी मजबूरी में इंसान को जो काम मिले वो करना पड़ता है तो कभी अपने आत्मसम्मान के लिए काम करना पड़ता है . कोई काम छोटा बड़ा नही होता लेकिन कभी कभी हमारी आँखों के सामने कुछ ऐसा हो जाता जिसे देख हम  आशचर्यचकित हो जाते है  और सोचने पर मजबूर  हो जाते है ये कैसे हो सकता है  .दिमाग में चल रहे सवालों के जबाब जानने की उत्सकुता बढती रहती है अंत में हार कर हम  अपने पूछ  सवालों के जबाबही लेते है. आज हम आपको एक ऐसी कहानी बताने वाले है जिसे जानकर पहले तो आपको थोड़ी हैरानी होगी लेकिन बाद में ये कहानी आपके दिल को छू लेगी .45 आदमियों के बीच अकेली महिला कुली हैं संध्या, इज्जत से कमाती हैं, बच्चों को बनाना चाहती हैं अफसर

जब आप भारत में ऑटो-रिक्शा में यात्रा कर रहे होते हैं तो आमतौर पर अपने ड्राइवर को अंग्रेजी में बोलते हुए नहीं सुनते हैं. लेकिन बेंगलुरु की निकिता अय्यर नाम की एक यात्री ने कुछ  ऐसा सुना और हैरान रह गई. निकिता को अपने ऑफिस पहुंचने में देर हो रही थी. वो सवारी का इंतजार कर रही थीं. इसी दौरान 74 वर्षीय बुजुर्ग ऑटो-रिक्शा चालक उनकी मदद करने के लिए रुका और कहा, “Please come in Maa’m, you can pay what you want.”. बुजुर्ग ऑटो-रिक्शा के मुंह से फर्राटेदार इंग्लिश सुनकर निकिता हैरान रह गईं.बुजुर्ग के व्यवहार से प्रभावित होकर निकिता उनके ऑटो में बैठ गई और पूछ ही लिया, ‘आप इतनी अच्छी अंग्रेजी कैसे बोल लेते हैं’. जवाब में बुजुर्ग ऑटो-रिक्शा चालक ने जो बताया वो सबको पढ़ना चाहिए.  बुजुर्ग ने बताया कि एक समय में वो मुंबई में इंग्लिश के लेक्चरर हुआ करते  थे. उन्होंने एमए और एम एड कर रखा है. रिटायर्ड होने के बाद उन्हें कर्नाटक में नौकरी नहीं मिली इसलिए वो ऑटो चालक बन गए.ऑटो रिक्शा चलाने वाला बन गया 3 हेलीकाप्टर का मालिक, कभी पाई-पाई के लिए थे मोहताज़ आज बना करोड़ो का मालिक

निकिता से बात करते हुए Pataabi ने बताया कि उन्होंने 60 साल की उम्र तक नौकरी की. सेवानिवृत्त होने के बाद वो बेंगलुरु वापस आ गए. वो निजी कॉलेज में नौकरी करते थे इसलिए उन्हें पेंशन भी नहीं मिलती है. बचत के पैसे भी खत्म हो रहे थे. ऐसे में उन्हें ऑटो चलाना शुरू कर दिया. इससे अब वो एक दिन में 1500 रुपए तक की कमाई कर लेते हैं. इस रकम से उनका खर्च चल जाता है. Pataabi का एक बेटा भी है जो उनकी आर्थिक मदद करता है. लेकिन वो पूरी तरह से उस पर निर्भर नहीं रहना चाहते हैं. यही कारण है कि वो खुशी-खुशी काम करते हैं.

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