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45 आदमियों के बीच अकेली महिला कुली हैं संध्या, इज्जत से कमाती हैं, बच्चों को बनाना चाहती हैं अफसर

मित्रों इस बात में तो कोई दो राय नही है कि इस दुनिया में शायद ही कोई ऐसा होगा जिसको अपने जीवन में  संघर्ष न करना पड़ा हो। इसी क्रम में आज हम एक ऐसे ही संघर्ष के संबंध में बताने वाले है, जिसमें एक महिला अपने परिवार को चलाने के लिये कर रही है कुल का काम। आपको बता दें कि जिस महिला की हम बात कर रहे है, वहीं एक ऐसी महिला है जो 45 आदमियों में एक अकेली कुली महिला है। पति के देहांत होने के पश्चात इस महिला के ऊपर परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी आ गई, फिर भी वह घर की व बाहर की दोनों जिम्मेदारियाँ बखूबी निभा रही है। आइए जाने इस महिला की संघर्ष भरी कहानी के संबंध, जो दिल को छू जाने वाली है। पति के गुजरने के बाद बच्चो को 5 रुपये तक नहीं देते थे घरवाले,2 हजार कर्ज लेकर बनी करोड़ो की मालिक

दरअसल आज हम संध्या नाम की महिला कुली के संबंध में बात कर रहे है, जो 31 वर्ष की उम्र में लोगों का सामना उठा रही है। वे कहती हैं कि “भले ही मेरे सपने टूट गए हैं, पर हौसले अभी भी ज़िंदा है। ज़िन्दगी ने मुझसे मेरा हमसफर छीन लिया है, पर अब बच्चों को पढ़ा लिखाकर फ़ौज में अफसर बनाना चाहती हूँ। इसके लिए मैं किसी के आगे हाथ नहीं फैलाऊंगी। कुली नंबर 36 हूँ और इज़्ज़त का खाती हूँ।” उनकी कही इन बातों से आप समझ ही गए होंगे कि वे कितनी स्वाभिमानी महिला हैं, किसी से मदद की याचना करने की बजाय वे महंत करके अपने परिवार के लिए रोज़ी रोटी कमाने में विश्वास रखती हैं। संध्या हर रोज़ मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करती हैं। उनके ऊपर एक बूढ़ी सास और तीन बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी है, इसलिए वे यह जिम्मेदारी उठाने के लिए, यात्रियों का बोझ उठती हैं। उन्होंने अपने नाम का रेल्वे कुली का लाइसेंस भी बनवा लिया है और अब वे इस काम को पूरे परिश्रम और हिम्मत के साथ करती हैं।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि 30 वर्ष की उम्र में पहले संध्या अन्य महिलाओं की तरह ही घर और बच्चों को संभाला करती थी। इसी बीच उनके पति भोलाराम बीमार हो गए। उनकी बीमारी काफ़ी समय तक चली और फिर 22 अक्टूबर 2016 को उनकी मृत्यु हो गई। जब उनके पति बीमार थे, तब भी वे मजदूरी करके अपने घर का ख़र्च उठाते थे। पति के गुजर जाने के बाद सारी जिम्मेदारी संध्या पर आ गई। उनको अपने परिवार के लिए रोजी-रोटी की चिंता होने लगी इसलिए उन्हें जल्द से जल्द किसी नौकरी की आवश्यकता थी, अतः जब कोई अन्य नौकरी ना मिल पाई तो उन्होंने कुली की नौकरी ही कर ली। संध्या कहती हैं कि जिस समय हमें नौकरी खोज रही थी तब किसी व्यक्ति ने उन्हें बताया कि कटनी रेलवे स्टेशन पर कुली की आवश्यकता है तो उन्होंने जल्दी से इस नौकरी के लिए आवेदन कर दिया।केरल की गलियों में गुब्बारे बेचने वाली लड़की की चमकी किस्मत, मॉडलिंग कर रातोरात बन गयी इंटरनेट सेलिब्रिटी

वह बताती है कि इस रेलवे स्टेशन पर 45 पुरुष कुली हैं और उनके बीच में अकेली संध्या महिला कुली के तौर पर काम करते हैं पिछले वर्ष ही उन्हें बिल्ला नंबर 36 मिला। सन्ध्या जबलपुर में रहती हैं और नौकरी के लिए कुंडम से प्रतिदिन 90 किमी ट्रैवल करके कटनी रेलवे स्टेशन पहुँचती हैं। फिर काम करके जबलपुर और फिर घर लौट पाती हैं। इस दौरान जब वे नौकरी के लिए जाती हैं तो उनकी सास बच्चों की देखभाल करती हैं। संध्या के तीन बच्चे हैं, शाहिल उम्र 8 वर्ष, हर्षित 6 साल व बेटी पायल 4 वर्ष की है। इन तीनों बच्चों के पालन और अच्छी शिक्षा के लिए वह लोगों का बोझ उठाकर अपने बच्चों को पढ़ाती हैं। वे चाहती हैं कि उनके बच्चे बड़े होकर देश की सेवा के लिए फ़ौज में अफसर बनें। इस जज्बे के संबंध में आप लोगों की क्या प्रतिक्रियायें है। मित्रो अधिक रोचक बाते व लेटेस्‍ट न्‍यूज के लिये आप हमारे पेज से जुड़े और अपने दोस्तो को भी इस पेज से जुड़ने के लिये भी प्रेरित करें।

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