सड़क किनारे अचार बेचने वाली महिला बनी करोड़ पति, मोदी भी मानते है जलवा - onlyentertainmentnews
Breaking News
Home / ज़रा हटके / सड़क किनारे अचार बेचने वाली महिला बनी करोड़ पति, मोदी भी मानते है जलवा

सड़क किनारे अचार बेचने वाली महिला बनी करोड़ पति, मोदी भी मानते है जलवा

मित्रों इस बात में तो कोई दो राय नही है कि भारत ही एक ऐसा देश है, जिसमें सर्वाधिक जनता गांव में ही रहती है, और खेती तथा पशुपालन पर निर्भर रहती है। आपको बता दें कि खेतों में अनाज की फसलों के साथ-साथ कई तरह की सब्जी की फसलें भी उगाई जाती हैं। ऐसे में पंजाब का एक किसान मशरूम की खेती से सालाना करोड़ों रूपये कमा रहा है। वहीं एक महिला तो सड़क किनारे अचार बेचकर करोड़पति बन गई। ऐसे में यह कहना गलत न होगा कि जब तक हासिल ना हो जाये तब तक हार मत मानो। आज हम एक ऐसी ही महिला के संबंध में बताने वाले है।

दरअसल आज हम एक ऐसी महिला की कहानी से रूबरू करा रहे है, जो ज्यादा तो नही पढ़ी, लेकिन उसके आईडिया ने उसे जो मुकाम दिया उसकी वे कभी कल्पना भी नही कर सकती। आज जिस शोहरत की मालकिन है, वो उस आईडिया से आपको भी आपकी मंजिल तक पहुचा सकता है। हमारे देश में कई लोग रोजगार की खोज में दूसरे शहरों यहा तक कि दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो दूसरे शहर की ओर पलायन कर ख़ुद का व्यवसाय प्रारंभ करते हैं, ऐसे लोगों की दृढ़ता और हिम्मत की सच में दाद देनी होगी। आज की कहानी एक ऐसी ही महिला की कामयाबी को लेकर है, जिन्होंने घर की आर्थिक स्थिति से परेशान आकर भारत की राजधानी दिल्ली का रुख किया और अपनी मजबूत इरादों की बदौलत सफलता का एक अनोखा संसार बनाया।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में निवास करने वाली कृष्णा यादव की कामयाबी के आसपास घूम रही है। वर्ष 1995-96 की बात है, कृष्णा का परिवार एक बुरे आर्थिक संकट से गुजर रहा था। उनके पति भी मानसिक तोर पर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, ऐसी स्थिति में परिवार की संपूर्ण जिम्मेदारी का भार कृष्णा के कंधे ही आ टिका। जीवन के इस कठिन दौर को चुनौती की तरह स्वीकार कर कृष्णा ने दिल्ली की ओर जाने के लिए निश्चित किया। अपनी एक सखी से 500 रूपये उधार लेकर कृष्णा परिवार समेत दिल्ली आ पहुंची, एक नई आशा और विश्वास के साथ। शहर में सरलता से रोजगार मिल पाना बिलकुल सरल नहीं था। काफी परिश्रम करने और इधर-उधर पेर मारने के पश्चात भी उन्हें कोई रोजगार नहीं मिल पाया, अंत में विवश होकर उन्होंने कमांडेट बीएस त्यागी के खानपुर स्थित रेवलाला ग्राम के फार्म हाउस के देखभाल करने की नौकरी शुरू की।

कमांडेट त्यागी के फार्म हाउस में विशेषज्ञों के निर्देशन में बेर और करौंदे के बाग लगाए गए थे। उस समय बाज़ार में इन फलों के अच्छे दाम मिलते थे थी, इसलिए वैज्ञानिकों ने कमांडेट त्यागी को मूल्य संवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण तकनीक से अवगत कराया। फार्म हाउस में कार्य करते-करते कृष्णा को भी खेती से बेहद लगाव बढता चला गया और फिर उन्होंने वर्ष 2001 में कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा में खाद्य प्रसंस्करण तकनीक का तीन महीने का प्रशिक्षण लेने का निर्णय लिया। इस जानकारी के संबंध में आप लोगों की क्या प्रतिक्रियायें है। मित्रो अधिक रोचक बाते व लेटेस्‍ट न्‍यूज के लिये आप हमारे पेज से जुड़े और अपने दोस्तो को भी इस पेज से जुड़ने के लिये भी प्रेरित करें।

About Rinku

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *