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प्लास्टिक कचरे से मोदी सरकार ने की सड़कें बनाने की तैयारी, तारकोल की पकड़ रहेगी बरकरार

मित्रों वैसे वर्तमान समय में शायद ही कोई ऐसा होगा जो प्लास्टिक की बनी वस्तुओं का प्रयोग न करता होगा, जाहिर सी बात है अगर हम लोग प्लास्टिक की बनी वस्तुओ का प्रयोग कर रहे है तो उसका कचरा भी इस दुनिया के लिये काफी बड़ा संकट बनता जा रहा है। ऐसे में मौजूदा सरकार द्वारा समय-समय पर कई अहम फैसले लिये गये जो सराहनीय है, पर जमशेदपुर यूटिलिटी सर्विसेस कंपनी की तर्ज पर हरियाणा शहर विकास प्राधिकरण की इंजीनियरिंग विंग शहर में सड़क निर्माण कार्य में प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल करेगी। हुडा अधिकारी इस टेक्नोलॉजी का अध्ययन कर रहे हैं। प्लास्टिक कचरे के इस्तेमाल से निर्मित होने वाली कोई भी सड़क जलभराव के बाद जल्द नहीं टूटेगी। यह टेक्नोलॉजी जुस्को ने जमशेदपुर में वर्ष 2011 में अपनाई थी।

आपको बता दें कि इको-फ्रेंडली होने से प्लास्टिक कचरे का निस्तारण आसानी से होता है। अगले माह पंचकूला में होने वाली प्रशासकीय बैठक में इस टेक्नोलॉजी पर चर्चा होगी। सरकार की अनुमति मिली तो हुडा से एक दल जमशेदपुर में टेक्नोलॉजी का जायजा लेने जाएगा। बता दें फरीदाबाद की कुछ निजी इंजीनियरिंग कंपनियां इसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बड़े संस्थानों की इंटरनल सड़क बनाने में कर रही हैं। आपको बता दें कि इसके लिये प्लास्टिक कचरे को जमा किया जाता है। इसे एक विशेष प्रकार की मशीन में डालकर 2 से 4 मिलीमीटर आकार के टुकड़े बनाए जाते हैं। इन प्लास्टिक टुकड़ों को सड़क निर्माण में प्रयोग होने वाली गिट्‌टी में डालकर 150 डिग्री सेल्सियस तापमान पर गर्म किया जाता है। करीब एक घंटे की इस प्रक्रिया के बाद प्लास्टिक के टुकड़े गिट्‌टी के साथ उसी के आकार में चिपक जाते हैं। इसके बाद इस गिट्‌टी को तारकोल में मिलाया जाता है। फिर इसे सड़क पर बिछाया जाता है। इस तरह प्लास्टिक के टुकड़े गिट्‌टी और तारकोल के बीच दोगुनी क्षमता के साथ पकड़ बनाए रखता है।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि सड़क बनाने में जो प्लास्टिक उपयोग में लाई जा सकती है उसमें कैरी बैग, प्लास्टिक कप और गिलास, पान मसाले के रैपर, बिस्किट, चॉकलेट के रैपर, दूध और किराने के सामानों की पैकिंग वाले प्लास्टिक शामिल किए जा सकते हैं। जिससे सड़क की मजबूती बढ़ेगी, जल भराव के प्रति रजिस्टेंस बढ़ेगा,लोड सहने की क्षमता बढ़ेगी, मेंटिनेंस कॉस्ट में कमी आयेगी, रोड की लाइफ काफी बढ़ेगी। देशभर में सड़क निर्माण में पहली बार प्लास्टिक कचरे का इस्तेमला जमशेदपुर यूटिलिटी सर्विसेस कंपनी ने किया था। 30 नवंबर 2011 को पहली बार साकची बाग जमशेद स्कूल से जुबली पार्क के मुख्य द्वार तक बनी सड़क में प्लास्टिक कचरा इस्तेमाल किया गया था। अब तक जमशेदपुर में इस तकनीक के जरिए 22 किमी लंबी सड़क बन चुकी है। जुस्कोगाइडलाइन के मुताबिक एक किलोमीटर सड़क निर्माण करने में करीब 10 से 12 टन तारकोल लगता है। इतनी मात्रा में एक टन प्लास्टिक कचरे का प्रयोग सड़क निर्माण में किया जा सकता है। 100 किमी सड़क निर्माण में 100 टन तारकोल और गिट्‌टी की बचत होती है। इस जानकारी के संबंध में आप लोगों की क्या प्रतिक्रियायें है। मित्रो अधिक रोचक बाते व लेटेस्ट न्यूज के लिये आप हमारे पेज से जुड़े और अपने दोस्तो को भी इस पेज से जुड़ने के लिये भी प्रेरित करें।

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