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दुनिया से जाने के बाद इतने करोड़ की सम्प्पति छोड़ गए है राहुल बजाज,ये होगा मालिक

दोस्तों जैसे सुख और दुःख जीवन का एक हिस्सा है .वैसे ही जीवन और मृत्यु जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई .जब कोई अपना इस दुनिया को छोड़कर जाता है तो कितना दुःख होता है लेकिन ये जीवन का नियम है जिसने इस धरती पर जन्म लिया है उसे एक दिन इस धरती और दुनिया को अलविदा कह कर जाना ही होगा .इस सच्चाई से कोई मुंह नही मोड़ सकता .लेकिन ऐसे समय में इंसान को हिम्मत से काम लेना चाहिए और भी मजबूत बनना चाहिए .बता दे हालही में खबर मिली है बजाज परिवार पर टूट गया है दुखो का पहाड़ .

यह बात है 1970 से 80 के दशक की। जब देश में सड़कें और सार्वजनिक परिवहन दोनों लगभग न के बराबर थे और उस दौर में भारत के आम लोगों को बजाज ने चेतक स्कूटर उपलब्ध कराया था। जी हां ‘हमारा बजाज’ टैगलाइन से बेचे जाने वाले ये स्कूटर सहज ही उस दौर में लोगों को गौरव, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का अहसास दिलाते थे, लेकिन अब इसी स्कूटर को देश को समर्पित करने वाले देश के दिग्गज बिजनेसमैन और बजाज ग्रुप (Bajaj Group) के पूर्व चेयरमैन राहुल बजाज हमारे बीच नहीं रहें।

गौरतलब हो कि उनका 83 साल की उम्र में दो दिन पहले निधन हो गया। राहुल बजाज साल 1965 में बजाज ग्रुप का हिस्सा बने थे और इसके बाद उन्होंने कंपनियों को एक नई ऊंचाईयों पर पहुंचाने का काम किया। इतना ही नहीं राहुल बजाज के कार्यकाल में कंपनी का टर्नओवर तकरीबन 7.2 करोड़ से 12 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया था और उन्होंने ऑटो सेक्टर (Auto Sector) में एक नई लहर पैदा कर दी थी।

वहीं राहुल बजाज का हौसला उन्हें बड़ा उद्योगपति तो बनाता ही है। इसके अलावा वो एक निडर और बहादुर इंसान भी रहें। वह बिना डरे बेबाकी से अपनी बात रखते थे फिर चाहें उनके सामने सरकार हो या कोई बड़ी हस्ती। आइए ऐसे में जानें उनका नेटवर्थ और उनसे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें…

रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल बजाज की कुल नेट वर्थ (rahul bajaj net worth) तकरीबन 820 करोड़ रुपये है और उन्होंने 30 अप्रैल 2021 को बजाज ग्रुप में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। मालूम हो कि वो लगभग 5 दशक से बजाज ग्रुप ऑफ कंपनीज से जुड़े रहे और कंपनी को शीर्ष पर ले जाने में अहम भूमिका अदा की।

वहीं ये बात तो आप सभी जानते हैं कि राहुल बजाज देश के एक सफल उद्योगपतियों में से थे और साल 2006 से लेकर 2010 वह राज्य सभा के सदस्य भी रहे थे। इतना ही नहीं उन्होंने अपने कार्यकाल में देश को ‘बजाज चेतक’ नाम से स्कूटर भी समर्पित किया और यह स्कूटर मध्यमवर्गीय परिवारों की पहचान बना और जिसकी बदौलत कंपनी ने भी ख़ूब तरक्की की।

इसके अलावा मालूम हो कि राहुल बजाज को उनके सामाजिक कार्यों के लिए कई पुरस्कारों से भी नवाजा गया। जिसमें साल 2001 में प्राप्त पद्म भूषण पुरस्कार तो शामिल है ही, वहीं उन्हें ‘नाइट ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर’ के खिताब से भी नवाजा जा चुका था और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राहुल बजाज जी को साल 2017 में लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए ‘सीआईआई राष्ट्रपति पुरस्कार’ भी दिया था।

वहीं बता दें कि राहुल बजाज स्वतंत्रता सेनानी जमनालाल बजाज के पोते थे और उनकी पढ़ाई दिल्ली के ही सेंट स्टीफेंस कॉलेज से हुई थी। इसके बाद उन्होंने मुंबई से लॉ की डिग्री हासिल की। वहीं एक दिलचस्प बात यह है कि राहुल बजाज के पिता कमलनयन और देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी दोनों कुछ समय तक एक ही स्कूल में पढ़े थे। मालूम हो कि बजाज समूह की असल शुरुआत बछराज बजाज से होती है, जो वर्धा महाराष्ट्र के एक साहूकार थे और उन्होंने 1905 में वर्धा में ‘कॉटन जिनिंग फैक्टरी’ शुरू की थी।

इसके बाद राजस्थान के सीकर में कनीराम के तीसरे बेटे जमनालाल को बछराज ने गोद लिया था और 1915 में 17 वर्ष की उम्र में दादा बछराज की विरासत जमनालाल बजाज को मिली। जमनालाल ने बजाज समूह का असल विस्तार किया और उन्होंने सूत से लेकर स्टील तक तमाम क्षेत्रों में समूह की उपस्थिति दर्ज कराई।

इसके अलावा आखिर में बताते चलें कि उनके बेटे कमलनयन बजाज ने 1954 में विरासत अपने हाथों में ली और बजाज समूह के ‘ताज का हीरा’ कही जाने वाले बजाज ऑटो कंपनी स्थापित की। इसके बाद बजाज समूह की कमान 1965 में राहुल बजाज के हाथों में आई और फिलहाल समूह की 40 से ज्यादा कंपनियां हैं।

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