आज़ादी से पहले गुलाम देश में खुली एक छोटी सी दूकान,जानिये कैसे बनी भारत की नंबर वन ब्रांड - onlyentertainmentnews
Breaking News
Home / विशेष / आज़ादी से पहले गुलाम देश में खुली एक छोटी सी दूकान,जानिये कैसे बनी भारत की नंबर वन ब्रांड

आज़ादी से पहले गुलाम देश में खुली एक छोटी सी दूकान,जानिये कैसे बनी भारत की नंबर वन ब्रांड

मित्रो इसमें कोई दो राय नही है कि परीश्रम ही एक ऐसी चाबी है जो भाग्य का ताला खोल सकती है। ऐसे में यह कहना गलत न होगा कि इस दुनिया में कब किसकी किस्मत चमक जाये इसका कुछ नही पता, क्योंकि इस दुनिया में पैसा कमाना इतना आसान काम नही है, कभी कभी तो कुछ लोग इसके लिये बहुत प्रयास करते है, उसके पश्‍चात भी सफलता हाथ नही लगती है। यहाँ मेहनत के साथ किस्मत का भी बड़ा अहम रोल होता हैं। हम लोगों के जीवन में कब क्‍या होने वाला है, और कब क्‍या बदलाव आने वाले है वह किसी को ज्ञात नही हो पाता है। इसी क्रम में आज हम एक ऐसे ब्रांड के संबंध में बात करने वाले है जो एक छोटी सी दुकान से आज बन गई दुनिया की नम्बर 1 कम्पनी। खबर विस्तार से जानने के लिये इस पोस्ट के अंत तक बने रहे।90 के दशक के सबसे खतरनाक विलेन थे सदाशिव अमरापुरकर,अंतिम दिनों में हो गया था ये हाल

दरअसल आज हम जिस ब्रांड की बात कर रहे है वो आजादी के बाद नंबर वन ब्रांड बनाने वाली कम्पनी हल्दीराम की जिसकी शुरुआत बीकानेर परिवार ने की थी, इस परिवार का पूरा खर्चा तनसुख दास के कंधों पर था, आजादी के 50 से 60 साल पहले से ही वे परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए लगातार संघर्ष करते चले आ रहे थे, वही तनसुख दास के बेटे भीखाराम अग्रवाल भी काम की तलाश में थे, उन्होंने अपने बेटे चांदमल के नाम पर एक छोटी सी दुकान खोली जिसका नाम भी भीखाराम चांदमल रखा गया था, इस दुकान पर मिलने वाला बीकानेरी भुजिया लोगों को काफी पसंद आने लगा जिसके बाद उन्होंने भुजिया नमकीन बेचने की ही सोच ली, बता दे कि भीखाराम ने नमकीन बनाने की कला अपनी बहन बीखी बाई से सीखी थी, जब भी बीखी अपने भाई के घर आती तो भुजिया साथ लेकर जरूर आया करती थी, भुजिया बेचकर इनकी रोजी रोटी जैसे तैसे चल रही थी, फिर आखिरकार सन 1908 में भीखाराम के घर पोते गंगा बिशन अग्रवाल का जन्म हुआ, बिशन अग्रवाल की मां उन्हें प्यार से हल्दीराम कहकर बुलाती थी, ऐसे में हल्दीराम ने बचपन से ही अपने घर में नमकीन भुजिया बनते हुए देखा था। जब हल्दीराम ने होश संभाला तो वह घर और दुकान के कामों में हाथ बंटाने लगे, केवल 11 साल की उम्र में हल्दीराम की शादी चंपा देवी से कर दी गई। शादी के बाद जिम्मेदारियां और बढ़ गई और हल्दीराम ने अपने दादा की भुजिया वाली दुकान पर बैठना शुरु कर दिया।सफेद दाढ़ी, मुरझाया सा बेहद उदास चेहरा लिए एयरपोर्ट पर सपोर्ट हुए शक्ति कपूर,पत्नी को ड्राप करते आये नज़र

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि हल्दीराम इस दुकान को आगे बढ़ाना चाहते थे इसलिए उन्हें कुछ अलग करने की जरूरत थी ऐसे में उन्होंने भुजिया का स्वाद बढ़ाने के लिए कुछ बदलाव किए। उन्होंने इसमें मोठ की मात्रा को बढ़ा दिया ऐसे में यह स्वाद ग्राहकों को और भी पसंद आ गया, धीरे-धीरे उनका परिवार भी समय के साथ बढ़ता चला गया और परिवारिक झगड़े भी उन्हें परेशान करने लगे, ऐसे में उन्होंने अलग होकर रहने का फैसला कर लिया, घर परिवार से अलग होने के बाद उन्हें कुछ भी जायदाद में हिस्सा नहीं मिला इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार 1937 में एक छोटी सी नाश्ते की दुकान खोली, इस दुकान में उन्होंने भुजि  या बेचना भी शुरू कर दिया, वह अक्सर अपने व्यापार को बढ़ावा देने के लिए भुजिया में बदलाव या एक्सपेरिमेंट करते रहते थे, समय बदला और उन्होंने इसके पूरे स्वाद को बदल डाला और उसको और भी चटपटा और क्रिस्पी बना दिया, डिमांड बढ़ती देखकर उन्होंने अपनी दुकान का नाम हल्दीराम रख दिया, 1970 में उन्होंने पहला नागपुर में स्टोर खोला जिसके बाद उन्होंने दूसरा स्टोर 1982 में दिल्ली में खोला, यहां उन्होंने नमकीन की मैन्युफैक्चरिंग के लिए अलग-अलग प्लांट भी लगवाए, देखते ही देखते हल्दीराम के प्रोडक्ट देश और दुनिया भर में बिकने लगे और नंबर वन ब्रांड बन गया, साल 2013-14 के बीच हल्दीराम का दिल्ली वाला कंपनी का रेवेन्यू 2100 करोड़ था जबकि नागपुर का 1225 करोड़, 2019 तक आते-आते हल्दीराम का सालाना रेवेन्यू 7131 करोड रुपए हो गया, आज हल्दीराम का नाम 400 से अधिक प्रोडक्ट बनाने के लिए और अपने    यूनिक स्वाद के लिए जाना जाता है। इस जानकारी के संबंध में आप लोगों की क्या प्रतिक्रियायें है। मित्रो अधिक रोचक बाते व लेटेस्ट न्यूज के लिये आप हमारे पेज से जुड़े और अपने दोस्तो को भी इस पेज से जुड़ने के लिये भी प्रेरित करें।

About Rinku

Leave a Reply

Your email address will not be published.