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पा”किस्तान के लाहौर म्यूजियम की गहराइयों में दफ़न है पहले विश्व युद्ध में लड़ने वाले 3.5 लाख सिखों का इतिहास

मित्रों जैसा की आप सभी अवगत ही होगें कि इस दुनिया में अक्सर अजीबो गरीब घटनायें घटित होती ही रहती है, जो कि हम लोगों को सोशल मीडिया के माध्‍यम से आये दिन सुनने को मिलती रहती है। जैसे कि पिछले कुछ दिनों से रूस व यूक्रेन के युद्ध को लेकर काफी खबरे सुर्खियों में बनी हुई है। आपको बता दें कि इस युद्ध का प्रभाव आस-पास सटे हुये सभी देशों पर पड़ा है। वहीं अगर बात भारत और पड़ोसी देश की करें तो कई ऐसे युद्ध हुये जिनमें भारत ने पड़ोसी देश को कड़ी टक्कर देने में कोई कसर नही छोड़ी है। इसी क्रम में पहले विश्वयुद्ध में लड़ने वाले 350000 सिखों का इतिहास लहौर में दफन था। जिसका खुलासा होते ही चारों ओर इसी की चर्चायें होने लगी है।

दरअसल पहले विश्व युद्ध को दुनिया के सबसे भीषण महायुद्ध के रूप में याद किया जाता है। इस महायुद्ध में लाखों भारतीय सैनिक ब्रिटेन की ओर से लड़े। इस युद्ध के सालों बाद एक हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ है। पहले विश्व युद्ध के दौरान भारत से करीब सवा तीन लाख पंजाबी सैनिकों ने भी अपना योगदान दिया था, जिनके रिकार्ड 97 सालों तक एक तहखाने में गुमनामी के अंधेरे में खोए रहे। अब ब्रिटेन के इतिहासकारों ने युद्ध में भारतीय सैनिकों के योगदान को लेकर खुलासा किया है। ब्रिटेन के इतिहासकारों ने खुलासा किया है कि पहले विश्व युद्ध में लड़ने वाले पंजाब के करीब 3.2 लाख सैनिकों के रिकॉर्ड 97 सालों तक एक तहखाने में पड़े रहे। रिपोर्ट्स के मुताबिक ये फाइलें पाकिस्तान के लाहौर म्यूजियम की गहराइयों में मिली हैं। इन फाइलों को अब डिजीटल रूप में बदलकर एक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक अब तक 45 हजार से अधिक डॉक्यूमेंट डिजिटाइज किए जा चुके हैं। अब तक इतिहासकारों, ब्रिटिश और आयरिश सैनिकों के वंशजों के पास सर्विस रिकॉर्ड के पब्लिक डेटाबेस मौजूद थे। वहीं युद्ध में शामिल होने वाले भारतीय सैनिकों के परिवारों के पास अभी तक ऐसी कोई सुविधा मौजूद नहीं थी। ऐसे में भारतीय सैनिकों के इन फाइलों को डिजीटल रूप में बदलने से उनके भी डेटाबेस आसानी से मिल सकेंगे।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि अगर एक रिपोर्ट की माने तो इन सैनिकों में हिंदू, मुस्लिम और सिख पंजाबी शामिल थे। ये सैनिक भारतीय सेना का करीब एक तिहाई थे। पंजाबी मूल के कुछ ब्रिटिश नागरिकों को डेटाबेस में अपने पूर्वजों की खोज के लिए पहले ही आमंत्रित किया जा चुका है। इन परिवारों ने डेटाबेस में पाया कि उनके गांव के सैनिकों ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फ्रांस, मध्य पूर्व, गैलीपोली, अदन और पूर्वी अफ्रीका के साथ-साथ ब्रिटिश इंडिया के अन्य हिस्सों के लिए अपनी सेवाएं दी थीं। फाइलों को डिजिटाइज करने के लिए ग्रीनविच यूनिवर्सिटी के साथ काम करने वाले यूके पंजाब हेरिटेज एसोसिएशन के अध्यक्ष अमनदीप मदरा का कहना है कि पंजाब पहले विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सेना के लिए भर्ती का मुख्य गढ़ था। अमनदीप मदरा के मुताबिक ज्यादातर लोगों का योगदान गुमनाम ही रहा। वहीं ज्यादातर मामलों में हमें उनके नाम तक नहीं पता। नोट – प्रत्येक फोटो प्रतीकात्मक है। इस जानकारी के संबंध में आप लोगों की क्या प्रतिक्रियायें है। मित्रो अधिक रोचक बाते व लेटेस्ट न्यूज के लिये आप हमारे पेज से जुड़े और अपने दोस्तो को भी इस पेज से जुड़ने के लिये भी प्रेरित करें।

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