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जोधाबाई के अस्त्तित्व की सच्ची कहानी,आज से पहले नहीं हुआ कभी इसका जिक्र

दोस्तों भारत जैसे देश में बहुत सारे राजा -महाराजाओ ने शासन किया है लेकिन कुछ के बारे में इतिहास के माध्यम से जानकारी मिलती रहती है और कुछ का इतिहास में भी वर्णन नही मिलता है इसीप्रकार से मुग़ल बादशाह अकबर का नाम सभी लोगो ने सुना होगा और अकवर के जीवन के बारे में बाते भी सुनी होगी, हालाकि अकबर एक महान प्रतापी राजा था और इनके कई पत्नियाँ भी थी ऐसा इतिहास के माध्यम से सुनने को मिलता है लेकिन अकबर की सभी पत्नियों में सबसे अधिक वर्णन “जोधाबाई” का होता है इसीलिए कई सीरियल और फिल्मो में अगर किसी के जीवन के अस्तित्व का वर्णन दिखाया जाता है तो वह है अकबर और जोधाबाई .इनके जीवन के बारे में बहुत ही नजदीक से दर्शाया गया है लेकिन आखिर में सच क्या है इसके बारे में अभी तक कोई नही जनता है इसीप्रकार से अकबर ने जोधा से विवाह किया था की नही और क्या जोधा का कोई अस्तित्व था ऐसे ही हम आपको कुछ प्रश्नों के उत्तर आज हम आप सभी लोगो को बताना चाहते है अगर जानने के इच्छा रखते है तो बने रहे लेख के अंत तक.

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ये तथ्य बताते हैं कि जोधाबाई का अस्तित्व था ही नहीं

1 . आपको जानकर हैरानी होगी की प्रसिद्ध पुस्तक अकबरनामा में जोधाबाई का कोई जिक्र नहीं है।

2 . जहांगीर की आत्मकथा ” तुजुक-ए-जहांगिरी” में भी जोधाबाई का कहीं कोई उल्लेख नहीं मिलता है।

3 . बहुत सी प्राचीन अरेबिक किताबों में लिखा है ‘हम इस निकाह को नहीं मानते, निकाह पर हमें संदेह है।”

4 . अकबर-ए-महुरियत पुस्तक में उल्लेख है कि “हमें इस हिन्दू निकाह पर संदेह है क्यौकी निकाह के वक्त राजभवन में किसी की आखों में आँसू नही थे और ना ही हिन्दू गोद भरई की रस्म हुई थी ।।”

5 . पारसी लोगों की पुस्तक परसी तित्ता में लिखा हुआ है कि “यह भारतीय राजा एक परसियन वैश्या को सही हरम में भेज रहा है , अत: हमारे देव (अहुरा मझदा) इस राजा को स्वर्ग दें ”

6 . हमारे इतिहास को राव तथा भट्ट ही प्राचीन काल से लिखते आये हैं। इन्होने लिखा है कि “गढ़ आमेर आयी तुरकान फौज , ले ग्याली पसवान कुमारी ,राण राज्या राजपूता लेली इतिहासा पहली बार ले बिन लड़िया जीत (1563 AD )।” मतलब आमेर किले में मुग़ल फ़ौज आती है। और एक दासी की पुत्री को ब्याह कर ले जाती है, हे रण के लिये पैदा हुए राजपूतों तुमने इतिहास में ले ली बिना लड़े पहली जीत।

यह है वास्तविकता :-

असल सत्य यह है कि शहंशाह अकबर का निकाह किसी तथाकथित जोधाबाई से नहीं बल्कि “मरियम-उल-जमानी” नामक महिला से हुआ था। यह लड़की आमेर के महाराज भारमल के विवाह में उनकी रानी के साथ आई पारसी दासी की पुत्री थी। पारसी लोगों की पुस्तान “परसी तित्ता” में इसी कारण अकबर को स्वर्ग देने की प्रार्थना पारसी लोग कर रहें हैं। क्यों की वे जानते हैं कि अकबर का निकास पारसी वैश्या के साथ हुआ था। इसके अलावा यह भी एक ऐतिहासिक तथ्य है कि बुंदेला राजपूतों ने मराठी राजपूतों के साथ मिलकर अकबर तथा उसके पुत्र जहांगीर को अपने क्षेत्र से खदेड़ दिया था।

जहांगीर की मां यदि जोधाबाई होती तो वह वास्तव में कभी मराठा तथा बुंदेला राजपूतों से लड़ने के लिए जहांगीर को भेजती ही नहीं। वर्तमान स्थिति यह है कि आजकल इस प्रकार के कई सीरियल्स टीवी पर दिखाई जा रहें हैं। जिनका किसी भी ऐतिहासिक तथ्यों से कोई सरोकार नहीं है। इस प्रकार ने सीरियल तथा फिल्मों से आज के युवा लोगों में भ्रामक जानकारी पहुंच रही है। यदि इस प्रकार के सिरियल्स अथवा फिल्मों का विरोध किया जाये तो इनको फ्री पब्लिसिटी का लाभ मिल जाता है। अतः सही यही है आप स्वयं ही इस प्रकार के मानसिक प्रदूषण फैलाने वाली चीजों का खुद ही बहिष्कार कर दें।

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