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भारत का ऐसा मन्दिर जंहा साड़ी-लहंगा पहनकर पुरुष खेलते हैं गरबा

दोस्तों भारत एक ऐसा देश है जहा पर विभिन्न प्रकार के धर्म, परम्पराओ और रीति-रिवाजो को मानने वाले लोग पाए जाते है और यहाँ पर विभिन्न प्रकार के त्यौहार पूरे देश भर में बड़ी धूम-धाम से मनाये जाते है जिसके कारण सभी जगहों पर हर एक त्यौहार अलग-अलग तरीके से मनाये जाते है इसीप्रकार से माँ आदिशक्ति की आराधना का पर्व नवरात्रि देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है  और माता रानी के मंदिरों में खूब भीड़ उमड़ी होती  है जिससे सभी भक्त अपने -अपने तरीके से  माता रानी की आराधना करते है जैसे कि कोलकाता में दुर्गा पूजा और गुजरात में नवरात्रि के विशेष मौके पर विभिन्न पर के खेलो का आयोजन किया जाता है हालाकि गुजरात की एक ऐसी जगह है जहा पर नवरात्रि के पावन पर्व पर सदियों से चली आ रही एक पुरानी परम्परा निभाई जा रही है तो आइये जानते है कि ऐसी कौन सी पुरानी परम्परा है जो नवरात्रि के पावन पर्व पर मनायी जाती है जानने के लिए बने रहे लेख के अंत तक.

इस मंदिर में साड़ी-लहंगा पहनकर पुरुष खेलते हैं गरबा, बेहद शानदार होता है नज़ारा

नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही मंदिरों से लेकर बाजार तक हर तरफ रौनक ही रौनक देखने को मिल रही है। इन दिनों मां की आराधना के लिए सजाये गए पंडालों में गरबा-डांडिया की भी अलग ही धूम रहती है। देश भर में लोग बड़े उत्साह के साथ गरबा और डांडिया में हिस्सा लेते हैं। वैसे तो आमतौर पर लड़कियों को गरबे के लिए सजते-संवरते देखा जाता है लेकिन गुजरात ही एक ऐसी जगह है जहां सिर्फ पुरुष ही गरबा खेलते हैं। हमबात कर रहे हैं गुजरात के वडोदरा में स्थित अंबा माता मंदिर की जहां नवरात्रि की अलग ही धूम देखने को मिलती है। यहां पुरुष गरबा खेलकर सदियों पुरानी परंपरा निभाते हैं। एक तरफ जहां सभी साड़ी- लहंगा पहनकर पुरुष गरबा खेल रहे हाेते हैं, वहीं कुछ महिलाएं झरोखे में बैठे हुए गाने गा रही होती हैं। यह नजारा देखने लोग दूर- दूर से मंदिर पहुंचते हैं।

यहां पिछले 200 सालों से पुरुष ही गरबा खेलते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब वड़ोदरा मे गायकवाड़ से पहले इस्लामी शासकों का शासन था तब स्त्रियों को परदे में रहना पड़ता और माता की आराधना के लिए पुरुष ही स्त्री का वेश धारण कर के यहां गरबा खेलते थे। घड़ियाली पोल अम्बा माता मंदिर के गरबा में आज भी जो गरबा खेलते है, वो सारे पुरुष ही होते है। पुराने समय में देर रात गरबा में महिलाओं के शामिल होने को सुरक्षित नहीं माना जाता था, इसलिए पुरुष इसे करने लगे। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि यहां महिलाओं के आने पर पाबंदी है। महिलाएं भी इसमें आ सकती हैं। लेकिन इस सदियों पुरानी परंपरा को कायम रखने के लिए वे सीधे इसमें नहीं जुड़ती हैं, इसकी बजाय वे जश्न में शामिल होकर गाना-बजाना करती हैं।’इसीप्रकार से अगर आप सभी लोग रोचक जानकारी प्राप्त करना चाहते हो तो आप में पेज के साथ बने रहे हमेशा के लिए और अपने मित्रो से कहे हमारे इस पेज के साथ जुड़ने के लिए कहे धन्यवाद.

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